प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
पापांकुशा एकादशी दशहरे के अगले दिन मनाई जाती है।
इसे अश्विन मास की एकादशी कहते हैं। इस साल यह 3 अक्टूबर को होगी। जानें इस दिन व्रत रखने से क्या फल मिलता है। आश्विन मास के शुकृृपक्ष में पापांकुशा एकादशी का व्रत किया जाता है।
यह एकादशी सब पापों को हरनेवाली तथा उत्तम है। दशमी तिथि के शाम 7 बजे से एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी, लेकिन उदया तिथि में इसका व्रत 3 अक्टूबर को किया जाएगा।
आज 3 अक्टूबर शुक्रवार का दिन है। इस दिन श्रवण नक्षत्र के साथ धनिष्ठा नक्षत्र का संयोग मिल रहा है,इसके अलावा ,धृति योग 09:45 PM तक रहेगा।
पापाकुंशा एकादशी व्रत विधि
इस दिन विष्णु भगवान के साथ माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का अभिषेक दक्षिणावर्ती शंख से करें। दूध में केसर मिलाकर शंख में भरें और फिर भगवान का अभिषेक करें। दिन भर व्रत करें और रात को भगवान विष्णु का जागरण करें।
पापाकुंशा एकादशी महत्व
पद्मपुराण में लिखा है कि इस दिन सम्पूर्ण मनोरथ की प्राप्ति के लिए मनुष्यों की स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करने वाले पद्मनाभ वासुदेव का पूजन करना चाहिए।
इस दिन व्रत रखने से सभी पाप खत्म हो जाते हैं और मनुष्य को भगवान को नरक नहीं जाना पड़ता। मुनि चिरकाल तक कठोर तपस्या करके जिस फलको प्राप्त करता है, वह उस दिन भगवान् गरुड़ ध्वजको प्रणाम करने से ही मिल जाता है।
पृथ्वीपर जितने तीर्थ ओर पवित्र देवालय हैं, उन सबके सेवन का फल भगवान् विष्णु के नाम कीर्तनमात्र से मनुष्य प्राप्त कर लेता है।
इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।