पाकिस्तान की बेरहमी के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में आवाज उठी है। पाकिस्तान पर आरोप है कि वो पाक कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां कर रहा है और वहां लोगों पर मारा जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में PoK के साथ पाकिस्तान के रवैये को लेकर गवाही भी दी गई हैं। इसमें सड़कों को बंद करने, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां करने और आतंकवाद-रोधी कानूनों का इस्तेमाल करने जैसे आरोप शामिल हैं।
PoK में जरूरी सामान की सप्लाई रोक रहा पाकिस्तान
UNHRC के 62वें सत्र के दौरान, स्विस कश्मीर मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष मिर्जा शफीक ने कहा कि पुलिस और रेंजर्स ने इस इलाके को पाकिस्तान से जोड़ने वाली सड़कों को बंद कर दिया है, जिससे भोजन, दवाइयों और अन्य जरूरी चीजों की सप्लाई में रुकावट आ रही है।
मिर्जा शफीक ने PoK में ऐसी स्थिति को राजनीति नहीं, बल्कि क्रूरता बताया। शफीक ने कहा, ‘इन पाबंदियों से पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर अशांति फैल सकती है।’
शफीक ने अपनी 90 वर्षीय मां की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई और कहा कि वे पिछले लगभग तीन हफ्तों से उनसे संपर्क नहीं कर पाए हैं और उनकी साप्ताहिक दवाइयां मिलना भी मुश्किल हो गया है।
जेनेवा में UN के बाहर किया विरोध प्रदर्शन
यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने भी UNHRC सत्र के दौरान जेनेवा में UN मुख्यालय के बाहर मशहूर ‘ब्रोकन चेयर’ स्मारक पर विरोध प्रदर्शन किया।
UKPNP के नेताओं में जमील मकसूद और अमजद यूसुफ शामिल थे। इन्होंने पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने खास तौर पर रावलकोट में 7 जून को हुई गोलीबारी की घटना का जिक्र किया, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल भी हुए थे।
PoK में 22 लोगों की मौत
मिर्जा शफीक ने दावा किया कि PoK में पिछले 20 दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 22 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, 576 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 34 लोगों पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
शफीक ने यह तक दावा किया कि मारे गए कुछ लोगों के शव उनके परिवारों को भी नहीं सौंपे गए हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दखल देने और पाकिस्तानी सरकार तथा जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के बीच बातचीत कराने की अपील की।