एक कोशिश ऐसी भी: बुजुर्गों के अंतिम सफर में बन रही सहारा

वर्षा वर्मा (समाज सेविका):

सफेदाबाद स्थित वृद्ध आश्रम मातृ-पितृ सदन में आज सुबह उस समय भावुक माहौल बन गया, जब आश्रम में रह रही एक बुजुर्ग माताजी के निधन की सूचना मिली। सूचना मिलते ही सामाजिक संस्था “एक कोशिश ऐसी भी” ने अपनी मानवीय जिम्मेदारी निभाते हुए तुरंत अंतिम संस्कार की व्यवस्था संभाली।

संस्था ने पहले ही यह संकल्प लिया है कि मातृ-पितृ सदन में रहने वाले बुजुर्गों के निधन के बाद उनके शव को सम्मानपूर्वक “गोद” लेकर अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी उठाई जाएगी। इसी संकल्प को निभाते हुए संस्था के सदस्यों ने निशुल्क शव वाहन की व्यवस्था कर माताजी के पार्थिव शरीर को बैकुंठ धाम पहुंचाया और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई।

संस्था का यह प्रयास समाज के सामने मानवता और सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। ऐसे समय में, जब कई बुजुर्ग अपने परिवारों से दूर जीवन बिताने को मजबूर हैं, “एक कोशिश ऐसी भी” जैसे संगठन उनके अंतिम सफर में सम्मान और अपनापन देने का कार्य कर रहे हैं।

संस्था ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल सेवा करना नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देना भी है कि हर बुजुर्ग सम्मान और संवेदनशील व्यवहार का हकदार है।

यदि कोई व्यक्ति या परिवार इस तरह की वास्तविक सामाजिक सेवा से जुड़ना चाहता है या सहायता प्राप्त करना चाहता है, तो संस्था से संपर्क कर सकता है।

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