नाटो के सदस्य देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को यह संदेश देने में जुटे दिख रहे हैं कि वे यूरोप की रक्षा के लिए अधिक खर्च करने के उनके आह्वान का पालन कर रहे हैं।
ट्रंप के साथ शिखर सम्मेलन से पहले नाटो के नेताओं ने मंगलवार को अरबों डॉलर के हथियार समझौतों की घोषणा की।
तुर्किये में हुआ नाटो देशों का सम्मेलन
नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के 32 सदस्य देशों के नेताओं का यह दो दिवसीय सम्मेलन तुर्किये के अंकारा शहर में मंगलवार से शुरू हो गया।
नाटो के महासचिव मार्क रूट ने कई पहलों की घोषणा की। इस दौरान स्क्रीन पर अलग-अलग समझौतों की कुल कीमत दिखाई गई। उन्होंने पूरे सैन्य गठबंधन में रक्षा उद्योग में क्रांति लाने की अपील की और रूस के साथ-साथ चीन, उत्तर कोरिया व ईरान के भारी-भरकम रक्षा खर्च को लेकर चेतावनी दी।
रूट ने कहा, ‘हमारे पास आराम करने के लिए समय नहीं है। हमें अभी ऐसी क्षमताओं की जरूरत है, ताकि हम हमेशा तैयार रह सकें। यह सुरक्षा के हालात की मांग है।’
रूट ने कहा कि नाटो के सहयोगी अगले पांच वर्षों में अपनी एंटी-ड्रोन क्षमताओं पर 40 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश करेंगे। हालांकि अक्सर ही यूरोप के रक्षा क्षेत्र की आलोचना होती रही कि यहां लालफीताशाही बहुत है और कंपनियों व देशों के बीच होड़ है।
इसी वजह से यूरोप हथियारों की खरीद के लिए अमेरिका पर ज्यादा निर्भर हो गया है। नाटो देशों की ओर से जिन कई समझौतों की घोषणा की गई, उनके बारे में पहले कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
इन समझौतों में यूरोपीय देशों की ओर से अमेरिकी कंपनी नार्थरोप ग्रुम्मन से निगरानी ड्रोन खरीदने और नाटो द्वारा स्वीडन की रक्षा कंपनी साब से विमानों की खरीद शामिल है। जबकि अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन और जर्मनी की राइनमेटाल ने जर्मनी में एटीएसीएमएस मिसाइलों के संयुक्त उत्पादन के लिए समझौता किया है।
ये घोषणाएं ऐसे समय की गई हैं, जब ट्रंप कई बार रक्षा क्षेत्र में अपर्याप्त योगदान और अमेरिका पर अधिक निर्भरता को लेकर यूरोप की आलोचना कर चुके हैं।
ट्रंप ने दौरे से पहले एक वीडियो संदेश में भी यूरोप से अपनी रक्षा पर अधिक खर्च करने का आग्रह किया। वह सैन्य गठबंधन नाटो के सम्मेलन में हिस्सा लेने और तुर्किये के राष्ट्रपति से मिलने के लिए मंगलवार को अंकारा पहुंचे।
तुर्किये से प्रतिबंध हटाएंगे ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि वह तुर्किये से प्रतिबंध हटाएंगे और एफ-35 लड़ाकू विमानों की संभावित बिक्री पर निर्णय लेंगे। बता दें कि तुर्किये ने 2019 में रूस से एस-400 वायु रक्षा प्रणाली खरीदा था, जिससे नाराज होकर वाशिंगटन ने उसे एफ-35 कार्यक्रम से हटा दिया था।