आज ही के दिन, 6 साल पहले, लगा था लॉकडाउन; लोग घरों में कैद हो गए थे…

22 मार्च यह तारीख आते ही जेहन में साल 2020 की वो तस्वीरें आंखों के सामने आ जाती हैं, जब दुनिया ने एक ऐसा मंजर देखा था जिसके बारे में शायद कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।

जो देश कभी अपनी गहमागहमी, ट्रैफिक के शोर और कभी न खत्म होने वाली भागदौड़ के लिए जानी जाती है, अचानक एक दिन पूरी तरह शांत हो गई।

आज से ठीक 6 साल पहले जब कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए सरकार ने देश में ‘जनता कर्फ्यू’ का आह्वान किया गया था, जो आगे चलकर एक लंबे लॉकडाउन में बदल गया।

उस वक्त यह केवल एक सरकारी आदेश नहीं था, बल्कि एक ऐसी खामोशी की शुरुआत थी जिसने देश के हर कोने को अपनी चपेट में ले लिया।

पूरा देश अपने घरों में कैद

उस समय कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए सरकार ने सभी को घर में रहने को कहा था। बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। दुकानें बंद, ऑफिस खाली, स्कूल-कॉलेज ठप। पूरा देश अपने घरों में कैद हो गया था। 

पूरा देश अपने घरों में कैद

उस समय कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए सरकार ने सभी को घर में रहने को कहा था। बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। दुकानें बंद, ऑफिस खाली, स्कूल-कॉलेज ठप। पूरा देश अपने घरों में कैद हो गया था। 

सड़कों पर सिर्फ पुलिस और कुछ जरूरी सेवाएं ही दिखती थीं। पक्षी ज्यादा गूंजते थे, कुत्ते बेफिक्र घूमते थे और हवा साफ लगती थी। लेकिन साथ ही डर, अनिश्चितता और मुश्किलें भी बहुत थीं।

सोशल मीडिया पर फिर ताजा हुईं यादें

आज भी 6 साल बाद सोशल मीडिया पर लॉकडाउन के उस दौर के पुराने वीडियो और तस्वीरें फिर से वायरल हो रही हैं। इन वीडियो में देश की सड़कें सूनी दिखाई दे रही हैं, जहां परिंदों की चहचहाहट भी साफ सुनाई दे रही थी।

लोग उन पलों को याद करके न केवल भावुक हो रहे है थोड़े हैरान भी है। सोशल मीडिया पर लोग उस समय के अपने अनुभव साझा कर रहे हैं कि कैसे रातों-रात उनकी जिंदगी चारदीवारी के पीछे सिमट गई थी।

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