अग्निपथ योजना में बदलाव पर सेना प्रमुख बोले- सैनिक को तकनीक और युद्ध, दोनों में होना होगा माहिर…

 थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि अगर भविष्य के आकलन से पता चलता है कि अग्निवीरों को लंबे समय तक सेवा में बनाए रखने से रक्षा बलों को मदद मिल सकती है, तो इस योजना में उचित बदलावों पर विचार किया जा सकता है।

जनरल द्विवेदी ने अग्निपथ योजना को मानव संसाधन में बड़ा सुधार बताया है, जिसका मकसद युवा, फिट और भविष्य के लिए तैयार सेना बनाना है।

चीन के साथ संबंधों को लेकर जनरल द्विवेदी ने कहा कि गलतफहमियों को रोकने और सीमा से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच हर साल 1100 से ज़्यादा बार बातचीत होती है।

अग्निपथ योजना के तहत सेना चार साल के लिए सैनिकों को भर्ती करती है, जिसके बाद उनमें से 25 प्रतिशत को सेवा में बनाए रखा जाता है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को दूसरी नौकरियां करने के लिए सेवा से मुक्त कर दिया जाता है। राज्य और केंद्रीय पुलिस बलों में अग्निवीरों के लिए कई पद आरक्षित किए गए हैं।

बदल रहा युद्ध का स्वरूप

सेना प्रमुख ने कहा, अग्निपथ योजना के प्रविधानों के बारे में कोई भी फैसला पहले से तय डाटा के बजाय संचालन आवश्यकताओं और अनुभव के आधार पर लिया जाना चाहिए। युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आज के सैनिक को शारीरिक रूप से मजबूत, मानसिक रूप से फुर्तीला और तकनीकी रूप से कुशल होना चाहिए। यह समझना जरूरी है कि यह योजना अभी शुरुआती चरण में है, क्योंकि पहले बैच ने अभी तक अपना सेवाकाल पूरा नहीं किया है। इसलिए किसी भी तरह का अंतिम मूल्यांकन जल्दबाजी होगी।

थलसेना प्रमुख के तौर पर अपने दो साल के कार्यकाल की मुख्य उपलब्धियों के बारे में जनरल द्विवेदी ने कहा कि सबसे अहम उपलब्धि ‘आपरेशन सिंदूर’ है, क्योंकि इसने भारतीय सेना की संयुक्त, एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार युद्ध-क्षमता को साबित किया।

जनरल द्विवेदी ने बताया कि चीन सीमा पर स्थिति स्थिर है, लेकिन यह संवेदनशील बनी हुई है और इसके लिए लगातार सतर्कता की ज़रूरत है। दोनों पक्ष एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति ज़्यादा संवेदनशीलता दिखा रहे हैं। सेवानिवृत्त हो रहे सेना प्रमुख ने कहा कि कई सकारात्मक संकेत धीरे-धीरे हालात सामान्य होने की ओर इशारा करते हैं।

निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए ‘बाज बटालियन’ बनाएगी सेना

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने खुफिया निगरानी और रेकी की क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए खास “बाज़ बटालियन” के गठन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह पहल युद्धक्षेत्र के पूरे इकोसिस्टम में ड्रोन सिस्टम को आपरेट और मैनेज करने के लिए कर्मियों का खास समूह तैयार करेगी।

उन्होंने कहा, सेना को बड़े पैमाने पर लगातार ड्रोन शामिल करने, उन्हें अपग्रेड करने और उनकी कमी पूरी करने की ज़रूरत होगी। ‘बाज़ बटालियन’ बनाना इस जरूरत को पूरा करने के लिए सबसे अहम कदमों में से एक है। इन्हें मौजूदा’ रिमोटली पायलट एयरक्राफ्ट’ के आधार पर तैयार किया जाएगा।

इन बटालियनों में ऐसे कर्मियों का एक खास ग्रुप होगा जो रिमोटली पायलट एयरक्राफ्ट के पूरे सिस्टम को चलाने और मैनेज करने में माहिर होंगे। इससे खुफिया, निगरानी और टोही क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा। पाकिस्तान की ड्रोन क्षमताओं को लेकर जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रखती है और उभरते खतरों का सामना करने के लिए तैयार रहती है।

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