प्रवीण नांगिया (ज्योतिष सलाहकार):
आज सावन का पहला सोमवार है। हर कोई भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए मंदिर में भगवान शिव का विभिन्न चीजों से अभिषेक करता है।
शिवमहापु्राण में भगवान शिव को विभिन्न चीजों को अर्पित करने का फल और विधि बताई गई है। इसके अलावा भगवान शिव के धारा पूजन के बारे में बताया गया है।
शिवमहापुराण के रुद्रखंड के चौदहवें अध्याय में वर्णन किया गया है कि भगवान शिव की पूजा करते समय उन्हें क्या अर्पित करना चाहिए।
सावन के पहले सोमवार में आप भी पूजा करने जा रहे हैं, तो भगवान शिव की पूजा किस चीज से करना फलदायी होता है।
महादेवी जी को चावल चढ़ाने से लक्ष्मीजी की प्राप्ति होती है, लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ये चावल अखंडित होने चाहिए।
इन चावलों को विधिपूर्वक शिवलिंग पर अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा शिवमहापुराण में ब्रह्मा जी ने बताया है कि अगर आपको मां लक्ष्मी जी को पाना है तो आप शिवलिंग पर कमल के फूल, बेल पत्र, शंखपुष्प अर्पित कर भगवान शिव का पूजन करना चाहिए।
रुद्रप्रधान रुप से पूजन करते हुए शिवलिंग पर वस्त्र अर्पित करने चाहिए। गंध, पुष्प, धूप-दी से पूजा करने से पूजा का पूरा फल मिलता है, बिना इसके पूजा अधूरी मानी जाती है। एक लाख तिल से भगवान शिव का पूजन करने से व्यक्ति के सभी दुखों और कलेशों का नाश होता है। भगवान शिव पर जौ के दानों को अगर आप अर्पित करते हैं, तो आपको स्वर्गीय सुख मिलता है।
भगवान शिव का धारा पूजन
गेहूं के बने भोजन से लाख बार शिव का पूजन करने से संतान की प्राप्ति होती है। भक्तिभव से भगवान शिव की पूजा करने के बाद जलधारा अर्पित करनी चाहिए।
महामृत्युंजय मंत्र आदि का जाप करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि धारा पूजन जो करता है, उसे सुख और संतान दोनों मिलती हैं।
भस्म लगाकर भगवान शिव पर घी की धारा चढ़ानी चाहिए। बुद्धि की प्राप्ति के लिए दूध में शक्कर मिलाकर इसकी धारा भगवान शिव को चढ़ानी चाहिए।
इससे भगवान शिव उत्तम बुद्धि देते हैं। भगवान शिव को अगर शहद चढ़ाया जाए तो आपके कई रोगों को भगवान समाप्त करते हैं।
भगवान शिव को गन्ने का रस चढ़ाने से आनंद देते हैं। गंगाजल चढ़ाने से भोग और मोक्ष मिलता है। जो भगवान शिव की पूजा पूरी विधि विधान से करता है। महामृत्युंजय मंत्र के दस हजार जाप करता है, उसे सब सुख भोगने के बाद शिवलोक मिलता है।