नगर निकाय विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से प्रॉपर्टी टैक्स की नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब प्रॉपर्टी टैक्स की गणना कलेक्टर रेट के आधार पर होगी। इसके लिए शहरों को चार श्रेणियों में बांटा गया है।
नई व्यवस्था में फ्लोर फैक्टर, प्रॉपर्टी की कैटेगरी, रिबेट, टैक्स बढ़ने की अधिकतम सीमा, लाल डोरा में छूट, किराए पर दी गई संपत्ति पर अतिरिक्त टैक्स और गलत जानकारी देने पर सख्त जुर्माने का प्रावधान किया गया है। नए नियम के अनुसार अब कलेक्टर रेट के हिसाब से प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली की जाएगी।
महेंद्रगढ़ जिले की बात करें तो 80 हजार से अधिक प्रॉपर्टी हैं, जबकि अकेले नारनौल शहर में संपत्तियों की संख्या 42 हजार है। जाहिर है कि नए वर्ष में संपत्ति कर का भुगतान क्लेक्टर रेट के हिसाब से होगा। मार्केट में कलेक्टर रेट एक लाख रुपये से अधिक प्रति वर्ग मीटर है। ऐसे में बाजार की प्रॉपर्टी के लिए टैक्स भी उसी हिसाब से देना होगा।
एक महीने तक पुरानी दरों पर टैक्स भरने का मौका
विभाग के नोटिफिकेशन जारी होने के बाद प्रॉपर्टी मालिकों को एक महीने तक वर्ष 2013 की पुरानी दरों के अनुसार टैक्स जमा करने का विकल्प मिलेगा। इसके बाद सभी को नई दरों के अनुसार ही टैक्स देना होगा। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 तक के बकाया टैक्स और ब्याज पर कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कलेक्टर रेट से तय होगा प्रॉपर्टी का मूल्य
नई व्यवस्था के तहत संपत्ति का मूल्य कलेक्टर रेट के आधार पर तय किया जाएगा। केवल ग्राउंड फ्लोर होने पर फ्लोर फैक्टर रहेगा, जबकि हर अतिरिक्त मंजिल या बेसमेंट बनने पर इसमें 0.25 की बढ़ोतरी होगी।
शहरों का दो वर्गों में किया गया है वर्गीकरण
बी वर्ग में प्रदेश के सभी नगर परिषदों को शामिल किया गया, जबकि सी में सभी नगर पालिकाओं को शामिल किया गया है।
पूंजीगत मूल्य की गणना कैसे होगी?
- अपार्टमेंट, फलैट, एवं स्वतंत्र तलों को छोड़कर समस्त संपत्तियों के लिए पूंजीगत मूल्य की गणना
- भूखंड क्षेत्रफल गुणा कलेक्टर रेट गुणा तल कारक से होगी।
- अपार्टमेंट, फलैट की पूंजीगत मूल्य की गणना का ये रहेगा फार्मूला
- कारपेट क्षेत्रफल गुणा कलेक्टर रेट
- स्वतंत्र तलों की पूंजीगत मूल्य की गणना के लिए भूखंड का क्षेत्रफल गुणा में कलेक्टर रेट के हिसाब से किया जाएगा।
पुरानी व्यवस्था के अनुसार टैक्स का निर्धारण कैसे होता था?
- आकार आधारित: टैक्स का निर्धारण मुख्य रूप से प्लाट के रकबे (आकार) और निर्माण के क्षेत्रफल पर निर्भर था।
- एक जैसा फार्मूला:एक ही कालोनी में एक जैसे आकार की संपत्तियों के लिए लगभग एक समान टैक्स का प्रावधान था, भले ही उनका आंतरिक उपयोग कुछ और हो।
- कम बदलाव: यह पुरानी प्रणाली लगभग 13 वर्षों तक बिना किसी बड़े बदलाव के लागू रही थी, जिसे अब नई नीति से बदल दिया गया है।
समय पर टैक्स नहीं भरा तो लगेगा ब्याज
समय पर प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं करने पर 1.5% प्रतिमाह की दर से साधारण ब्याज देना होगा। वहीं, सभी प्रकार की रिबेट और छूट का लाभ केवल उन्हीं संपत्तियों को मिलेगा, जिन्होंने सेल्फ-सर्टिफिकेशन कराया हो और बकाया टैक्स, ब्याज व पेनाल्टी का एकमुश्त भुगतान किया हो। किस्तों में भुगतान करने वालों को किसी प्रकार की रिबेट नहीं मिलेगी