अब केवल UPI पिन दर्ज करने से भुगतान संभव नहीं होगा, अतिरिक्त प्रक्रिया अनिवार्य; जानें ऑनलाइन भुगतान का नया फॉर्मेट…

ऑनलाइन भुगतान में धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए यूपीआई समेत सभी डिजिटल प्लेटफार्म से होने वाले लेनदेन के लिए दो स्तरीय प्रमाणीकरण बुधवार को अनिवार्य हो गया है।

इसका मतलब है कि अब केवल यूपीआई पिन डालने से ही भुगतान पूरा नहीं होगा बल्कि ओटीपी, अंगुली के निशान या चेहरे का सत्यापन जैसे कदम भी जरूरी होंगे। इस तरह यूपीआई पिन लीक होने की स्थिति में भी अनधिकृत भुगतान को रोका जा सकेगा।

RBI का ऑनलाइन पेमेंट पर बदला नियम 

आरबीआई ने कहा है कि सभी डिजिटल भुगतान लेनदेन में दो-स्तरीय सत्यापन करना अनिवार्य है। हालांकि इसके लिए किसी विशेष तरीके को अनिवार्य नहीं किया गया है। लेकिन अधिकांश मामलों में एसएमएस के जरिये आने वाले ‘वनटाइम पासवर्ड’ (ओटीपी) का अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

नए प्रविधानों के तहत बैंकिंग एप में स्क्रीनशाट लेने और स्क्रीन रिकार्डिंग की सुविधा भी सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित कर दी गई है। यह कदम यूजर को किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचाने के मकसद से उठाया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अतिरिक्त सत्यापन व्यवस्था लागू होने से डिजिटल लेनदेन में कुछ सेकंड की देरी हो सकती है, क्योंकि उपयोगकर्ता को अतिरिक्त ओटीपी या अन्य सत्यापन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। हालांकि, इससे डिजिटल भुगतान प्रणाली में सुरक्षा और भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।

मार्च में रिकॉर्ड तोड़ भुगतान 

मार्च में यूपीआई से 29.53 लाख करोड़ रुपये मूल्य के डिजिटल भुगतान हुए। यूपीआई के जरिये होने वाले भुगतान मार्च में रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच गए।

नेशनल पेमेंट कारपोरेशन आफ इंडिया द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान 29.53 लाख करोड़ रुपये मूल्य के ट्रांजेक्शन हुए जबकि इस तरह के भुगतान की संख्या पहुंचकर 22.64 अरब हो गई।

पिछले साल की समान अवधि में 24.77 लाख करोड़ रुपये मूल्य के ट्रांजेक्शन हुए थे। इस तरह सालाना आधार पर इसमें 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

फरवरी में यूपीआई ट्रांजेक्शन का मूल्य 26.84 लाख करोड़ रुपये था। मार्च में प्रतिदिन औसत ट्रांजेक्शन 73 करोड़ रहा और इसका औसत मूल्य 95,243 करोड़ रुपये था।

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