डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका प्रवासियों को लेकर काफी सख्त रवैया अपना रहा है। जानकारी के मुताबिक अब वह ऐसा डेटाबेस तैयार करने जा रहा है जिसमें अमेरिका आने या फिर यहां से जाने वाले विदेशियों की जानकारियों स्टोर की जाएंगी।
इसमें बायोमीट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा और लोगों की तस्वीरें भी खींचकर सुरक्षित रख ली जाएंगी।
कस्टम ऐंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में बताया गया है कि विदेशियों की तस्वीरों के साथ ही उनका फेशियल रिकग्निश्न डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
एयरपोर्ट, बंदरगहों और सीमाई इलाकों में इस सिस्टम को लगाया जाएगा। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि गलत दस्तावेजों के आधार पर अमेरिका आने वाले लोगों पर कार्रवाई सनिश्चि करने और अपराध पर लगाम लगाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
पहले भी सीबीपी विदेश से आने वाले लोगों का बायोमीट्रिक डेटाबेस लेता रहा है। हालांकि अब इसका विस्तार किया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक अब यह नियम प्रवासियों, ग्रीन कार्ड होल्डर और कुछ समय के लिए यात्रा करने वालों पर भी लागू होगा। बताया गया है कि दो महीने में नए नियम लागू हो जाएंगे।
नवंबर 2020 में भी अमेरिकी प्रशासन ने इस तरह के नियम लागू करने की कोशिश की थी। हालांकि अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन ने इसका विरोध किया था और कहा था कि इस सिस्टम में कई खामियां हैं।
कई बार फेशियल रिकग्निशन सिस्टम गलत भी साबित होता है। ऐसे में कई बार मासूमों के भी फंसने के चांस रहते हैं।
सीबीपी का कहना है कि यह नियम लागू करने से वीजा फ्रॉड में कमी आएगी और तय समय से ज्यादा रहने वाले लोगों की भी आसानी से पहचान हो जाएगी।
नियम लागू होने के बाद अमेरिका पहुंचने वाले या फिर वहां से जाने वाले लोगों को फोटो खिंचवानी होगी। ऐसा ना करने पर उसपर कार्रवाई हो सकती है।