सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक अमृत महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महापूजा, जलाभिषेक के बाद मंदिर के शिखर कलश का 11 तीर्थों के जल से अभिषेक किया।
उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का नाम लेते हुए कहा कि आजादी के बाद की सरकारों ने देश के स्वाभिमान से जुड़े प्रतीकों की उपेक्षा की।
सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार भी इससे अछूता नहीं रहा था। पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षण का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि दुनिया की कोई भी शक्ति भारत को झुकने या दबाव के आगे घुटने टेकने पर मजबूर नहीं कर सकती।
सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को आयोजित अमृत पर्व समारोह में प्रधानमंत्री मोदी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि महमूद गजनवी, मुहम्मद तुगलक, अलाउद्दीन खिलजी जैसे आक्रांताओं ने देश के स्वाभिमान के प्रतीकों पर हमला किया।
वे भूल गए कि ये हमारी आस्था के दिव्य केंद्र हैं। दुनिया ने अपने राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक चिह्नों को संजोया। लेकिन, भारत में आजादी के बाद राजनीतिक कारणों से इनकी उपेक्षा की गई। सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार भी इससे अछूता नहीं रहा। हालांकि, प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद एवं उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयास से आज से 75 वर्ष पहले इसका पुनर्निर्माण कराया गया।
सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से सदियों प्राचीन कलंक मिटा। मोदी ने कहा कि उन्हें सभी तीर्थों के पुनरोद्धार का मौका मिला है, यह उनका सौभाग्य है। देश के स्वाभिमान के प्रतीकों की उपेक्षा करने वाली शक्तियां आज भी मौजूद हैं। 500 वर्षों के संघर्ष के बाद राम मंदिर का निर्माण हुआ तो उसका भी विरोध किया गया। 11 मई को राजस्थान के पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षण को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तब भी दुनिया की ताकतें भारत का विरोध करती रहीं।
आर्थिक संकट उत्पन्न कर सभी रास्ते बंद करने का प्रयास किया गया। लेकिन, भारत की अगुआई अटल बिहारी वाजपेयी के हाथ में थी। हमें कोई झुका नहीं सका। प्रधानमंत्री इससे पहले सोमनाथ स्थित वायु सेना के हेलीपैड पर उतरे तथा रोड शो करते हुए मंदिर परिसर तक पहुंचे। यहां पहुंचकर सबसे पहले प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
आजादी के बाद सरदार पटेल के प्रयासों से ही सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हो पाया था। मंदिर पर पहली बार हुए हमले की एक सहस्त्राब्दि पूरी हो चुकी है। मोदी की उपस्थिति में मंदिर के शिखर कलश का 11 तीर्थों के जल से अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रों के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने 90 मीटर ऊंची क्रेन से बंधे कलश को रिमोट से संचालित कर शिखर कलश का अभिषेक किया।
इससे पहले मोदी ने सोमनाथ महादेव की महापूजा की तथा जलाभिषेक किया। समारोह के दौरान वायु सेना की सूर्यकिरण टीम ने 6 हाकएमएके-132 विमान से एयर शो किया। आकाश में तिरंगा व मंदिर के ऊपर दिल का आकार बनाते हुए पायलटों ने यहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।