अविश्वास प्रस्ताव लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा: पीपी चौधरी बोले- यह संसदीय मर्यादा निभाने की प्रक्रिया…

एक राष्ट्र एक चुनाव के लिए बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी का कहना है कि संविधान में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोई व्यवस्था नहीं है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था के एक भाग के रूप में इसे स्वीकार किया जा रहा है।

उन्होंने 2029 से 2034 के बीच आने वाले विधानसभा चुनाव तथा किसी राज्य की सरकार के गिरने के बाद की व्यवस्था के संदर्भ में चर्चा के दौरान यह बात कही।

संविधान संशोधन विधेयक 2024 एवं संघ राज्य क्षेत्र कानून संशोधन विधेयक 2024 पर गुजरात राज्य की राय जानने के लिए गांधीनगर पहुंचे संयुक्त संसदीय समिति के सदस्यों ने राज्य सरकार, राजनीतिक दलों, सामाजिक एवं नागरिक संगठन तथा व्यापारिक संगठनों से चर्चा की।

इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि 2029 से 2034 के बीच कोई राज्य सरकार गिर जाने की स्थिति में चुनाव कराएंगे अथवा अन्य कोई व्यवस्था होगी। इस पर उनका कहना था कि इस समयावधि में सरकार के गिर जाने पर शेष समयावधि के लिए ही चुनाव कराये जा सकते हैं।

उनका यह भी कहना था कि संविधान में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का कोई प्रविधान नहीं है लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए इस तरह के प्रस्ताव को माना ही जा रहा है तो विशेष समयावधि के मध्य अल्प काल की सरकार को चुनने में क्या आपत्ति हो सकती है।

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