भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बड़ी मजबूती मिलने जा रही है।
गुजरात के वड़ोदरा स्थित टाटा-एयरबस संयंत्र में तैयार किया गया पहला स्वदेशी एयरबस सी-295 सैन्य परिवहन विमान अब उड़ान परीक्षण के लिए तैयार है। हाल ही में वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने संयंत्र का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा की।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना ने इसे देश के घरेलू एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। यह परियोजना टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और एयरबस की साझेदारी में विकसित की जा रही है, जो भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
भारत ने स्पेन के साथ 56 सी-295 विमानों के लिए करीब 21,935 करोड़ रुपये का समझौता किया है। इनमें 16 विमान सीधे स्पेन से मिलेंगे, जबकि 40 विमानों का निर्माण भारत में होगा।
इस परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने संयुक्त रूप से 2024 में किया था।सी-295 विमान वायुसेना के पुराने एवरो-748 विमानों की जगह लेंगे। ये आधुनिक सामरिक परिवहन विमान सैनिकों की तैनाती, हथियार और रसद आपूर्ति, चिकित्सा निकासी तथा विशेष अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
एयरबस से 70 सैनिकों को ले जा सकेंगे
दो प्रैट एंड व्हिटनी पीडब्ल्यू127जी टर्बोप्रोप इंजनों से लैस ये विमान दुर्गम पर्वतीय और सीमावर्ती क्षेत्रों की छोटी हवाई पट्टियों से भी संचालन करने में सक्षम है।
ये विमान अधिकतम 70 सैनिकों, 48 पैराट्रूपर्स या 24 मेडिकल स्ट्रेचर ले जा सकते हैं। विशेष बात यह है कि इन विमानों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली भी लगाई जा रही है। इससे भारतीय रक्षा तकनीक को नई पहचान मिलेगी।
मेक इन इंडिया अभियान के तहत 40 विमानों का अधिकांश ढांचा, अंतिम असेंबली और 13 हजार से अधिक पुर्जों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।
गौरतलब है कि एयरबस मूलत: नीदरलैंड्स की कंपनी है, लेकिन इसका मुख्यालय फ्रांस में स्थित है। वहीं, स्पेन समेत कई देशों में इसके विनिर्माण सुविधाकेंद्र हैं। स्पेन स्थित सुविधाकेंद्रों में सी-295 सैन्य परिवहन विमानों का निर्माण होता है।