भारत-यूएई रिश्तों को नई मजबूती, ऊर्जा और पेट्रोलियम स्टोरेज सेक्टर में होंगे दो अहम समझौते…

पीएम नरेंद्र मोदी की शुक्रवार को होने वाली यात्रा भले ही संक्षिप्त हो, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के लिहाज से यह काफी महत्वपूर्ण होगा।

उस दिन भारत और यूएई के बीच एलपीजी आपूर्ति और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के क्षेत्र में दो बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की तैयारी है।

हाल ही में यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) ने तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से बाहर निकला है और भारत उसके साथ ऊर्जा क्षेत्र में समझौता करने वाला पहला देश होगा।

पीएम मोदी चार यूरोपीय देशों नीदरलैंड, स्वीडन, नार्वे और इटली के दौरे से पहले यूएई जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद से होगी।

भारत और यूएई के बीच ऊर्जा क्षेत्र मजबूत साझेदारी

भारत और यूएई के बीच ऊर्जा क्षेत्र में पहले से ही मजबूत साझेदारी है। यूएई भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला चौथा सबसे बड़ा देश है, जो भारत की कुल जरूरत का करीब 11 प्रतिशत पूरा करता है।

यूएई भारत को सबसे ज्यादा रसोई गैस एलपीजी सप्लाई करने वाला देश भी है, जो भारत की लगभग 40 प्रतिशत मांग को पूरा करता है।

इसी वर्ष जनवरी में यूएई के राष्ट्रपति की नई दिल्ली यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच तीन अरब डॉलर का 10 वर्षीय एलएनजी सप्लाई समझौता हुआ था, जिससे भारत यूएई का सबसे बड़ा एलएनजी खरीदार बन गया है।

यूएई-भारत में तेल भंडारण की संभावनाओं का पता लगाने को इच्छुक

सूत्रों का कहना है कि यूएई भारत में तेल भंडारण की संभावनाओं का पता लगाने को इच्छुक है, जो आपातकालीन स्थिति में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा। वैसे 2017-18 में भारत और यूएई के बीच रणनीतिक कच्चे तेल भंडारण का समझौता हुआ था।

अबू धाबी नेशनल आयल कंपनी और इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज‌र्व्स लिमिटेड के बीच मंगलौर स्थित भंडारण सुविधा में 58.6 लाख बैरल तेल स्टोर करने का करार हुआ था। हाल ही में दोनों देश इस समझौते को विस्तार देने और अतिरिक्त भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में वार्ता हुई है।

भारत और यूएई के बीच संबंध अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचे

हाल के वर्षों में भारत और यूएई के बीच संबंध अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गए हैं। व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा संक्रमण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। दोनों देश 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं। खाड़ी क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए दोनों तरफ की सरकारें रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

भारत-यूएई साझेदारी को लेकर नई संभावनाएं

विशेष रूप से, सऊदी अरब और यूएई के बीच बढ़ती दूरी व क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच भारत-यूएई साझेदारी को लेकर नई संभावनाएं के द्वार खुल रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र के दो प्रतिद्वंदी देश सउदी अरब और यूएई के बीच तनावपूर्ण संबंधों का असर दक्षिण एशिया पर भी साफ पड़ता दिख रहा है।

यूएई ने पाकिस्तान से अपना 3.5 अरब डॉलर का कर्ज वापस मांग लिया, जबकि सऊदी अरब ने पाकिस्तान के बैंक में तीन अरब डॉलर जमा कराकर समर्थन जताया (कुल समर्थन आठ अरब डॉलर तक)। सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग समझौता भी हो चुका है।

वहीं, भारत और यूएई के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा निर्माण, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी समन्वय मजबूत हो रहा है।

पीएम मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता

आईएएनएस के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी 18 मई को नार्वे की यात्रा करने वाले हैं। इस दौरे से पहले नार्वे के अखबार डेगेंस नारिंग्सलिव में छपे एक लेख में पीएम मोदी की जमकर तारीफ की गई है और उन्हें दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता बताया गया है। नार्वे के पूर्व मंत्री एरिक सोल्हेम ने भी पीएम मोदी की तारीफ में कहा कि उनके जितना लोकप्रिय नेता कोई नहीं।

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