खाड़ी देशों की नई रणनीति: होर्मुज के विकल्प के लिए पाइपलाइन नेटवर्क को मिल रहा बढ़ावा…

अमेरिका-ईरान तनाव के लंबे समय तक बने रहने की आशंका के बीच खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं।

इसके तहत सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इराक सहित कई देश नई पाइपलाइन परियोजनाओं के जरिए वैकल्पिक तेल आपूर्ति मार्ग तैयार कर रहे हैं, ताकि किसी भी संभावित बाधा की स्थिति में वैश्विक बाजार तक तेल की आपूर्ति जारी रखी जा सके।

सरकारी अधिकारियों, तेल कंपनियों और ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, लाल सागर, स्वेज नहर और ओमान की खाड़ी से जुड़े मार्गों पर कम से कम सात बड़ी पाइपलाइन परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

कुछ परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जबकि कुछ योजना या प्रारंभिक अध्ययन के चरण में हैं।हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज का विकल्प पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं होगा। यमन में ईरान समर्थित हाउती विद्रोहियों ने हाल के दिनों में लाल सागर क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ाकर नए खतरे के संकेत दिए हैं। ऐसे में वैकल्पिक मार्ग भी सुरक्षा चुनौतियों से अछूते नहीं रहेंगे।

इसके अलावा पाइपलाइन के जरिए तेल भेजने में अधिक समय और लागत दोनों बढ़ सकती हैं।सऊदी अरब ने 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान संभावित खतरे को देखते हुए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन विकसित की थी।

यह पाइपलाइन अबकैक की प्रोसेसिंग सुविधा से तेल को लाल सागर तट पर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है, जहां से टैंकरों के जरिए तेल दुनिया के विभिन्न बाजारों में भेजा जाता है।वहीं, यूएई पहले से ही फुजैराह बंदरगाह के जरिए अधिक तेल निर्यात कर रहा है और करीब 300 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन भी विकसित कर रहा है।

लगभग तीन अरब डालर की इस परियोजना के पूरा होने पर प्रतिदिन 12 लाख बैरल अतिरिक्त तेल की आपूर्ति संभव होगी। यह परियोजना फिलहाल करीब आधी पूरी हो चुकी है। इराक भी बसरा से तुर्किये, सीरिया और जार्डन तक नई पाइपलाइन विकसित करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है।

प्रस्तावित नेटवर्क के जरिए भूमध्यसागर और लाल सागर के रास्ते एशिया समेत अन्य देशों तक तेल पहुंचाने की तैयारी है। इराक की लगभग 90 प्रतिशत सरकारी आय तेल निर्यात से आती है, इसलिए उसके लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करना रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, इन परियोजनाओं के पूरा होने पर अगले वर्ष तक होर्मुज जलडमरूमध्य को बाईपास करते हुए प्रतिदिन करीब 38 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात संभव होगा। वर्ष 2028 तक यह क्षमता बढ़कर 73 लाख बैरल प्रतिदिन हो सकती है, जो युद्ध से पहले होर्मुज के जरिए होने वाली कुल तेल आपूर्ति का लगभग 60 प्रतिशत होगी।

बता दें कि युद्ध से पहले होर्मुज से 2.3 करोड़ बैरल तेल रोज दुनियाभर के लिए निकलता था।इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि नई पाइपलाइनें पूरी तरह सुरक्षित नहीं होंगी। वे भी ईरान या उसके समर्थित समूहों के हमलों की जद में आ सकती हैं।

वहीं, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में हाउती विद्रोहियों की सक्रियता भी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। इसलिए वैकल्पिक मार्ग तेल आपूर्ति को कुछ हद तक सुरक्षित बना सकते हैं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व फिलहाल पूरी तरह समाप्त होने की संभावना नहीं है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *