प्रोस्टेट (Prostate) एक छोटा, अखरोट के आकार का पुरुषों के प्रजनन तंत्र का ग्रंथि (gland) है, जिसे ‘पौरुष ग्रंथि’ या ‘गदूद’ कहा जाता है। यह मूत्राशय (urinary bladder) के नीचे और मूत्रमार्ग (urethra) के चारों ओर स्थित होता है।
बीपीएच (BPH) क्या है और इसके उपचार विकल्प क्या हैं?
बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेशिया (बीपीएच) प्रोस्टेट ग्लैंड का (गैर-कैंसर युक्त) बढ़ना है, जो उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में सामान्य रूप से देखा जाता है। इसके सामान्य लक्षणों में शामिल है:
- बार-बार पेशाब आना, विशेषकर रात में
- पेशाब का कमज़ोर प्रवाह और
- ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने का एहसास
इस के उपचार में जीवन शैली में बदलाव, दवाइयां और सर्जरी शामिल हैं। दवाइयां राहत दे सकती हैं, लेकिन इनके दुष्प्रभाव जैसे चक्कर आना या ejaculatory dysfunction हो सकते हैं। कई मरीज़ नियमित दवाइयां लेने से बचना चाहते हैं या पहले से अन्य बीमारियों के लिए कई दवाइयां ले रहे होते हैं। गंभीर मामलों में TURP (Transurethral Resection of the Prostate) या लेज़र थेरेपी जैसी पारंपरिक सर्जरी की सलाह दी जाती है, लेकिन इनमें अस्पताल में भर्ती होना, लंबी रिकवरी और सेक्सुअल फंक्शन पर प्रभाव पड़ सकता है।
जैसे-जैसे चिकित्सा तकनीक विकसित हो रही है, आज मरीजों के पास ऐसे उपचार विकल्प उपलब्ध हैं जो कम आक्रामक हैं, जल्दी रिकवरी देते हैं और लंबे समय तक जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखते हैं। यही बदलाव बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेशिया (BPH) के आधुनिक उपचार विकल्पों में भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। आइए समझते हैं कि इस परिवर्तन के पीछे क्या कारण हैं और किन मरीजों को इन नए उपचारों से लाभ हो सकता है।
मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल तकनीक (MISTs) कैसे मदद कर रही हैं?
डॉ. ईश्वर दयाल, एचओडी, डिपार्टमेंट ऑफ़ यूरोलॉजी डॉ. आर.एम.एल. इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ, बताते हैं, “अब मरीजों की जीवन प्रत्याशा बढ़ गई है और बीपीएच के लक्षण 40-50 वर्ष की उम्र में ही दिखाई देने लगे हैं। ऐसे मरीजों को ऐसे उपचार विकल्पों की आवश्यकता होती है जो
- जल्दी काम पर वापसी,
- कम अस्पताल प्रवास और
- सेक्सुअल फंक्शन को सुरक्षित रखें।
प्रोस्टेटिक यूरेथ्रल लिफ्ट जैसी नई तकनीकें मौजूदा उपचारों से जुड़े जोखिमों को कम कर सकती हैं।”
2- 3 रोगों वाले मरीजों के लिए MISTs के लाभ:
डॉ. प्रियदर्शी रंजन, यूरोलॉजिस्ट एंड इंस्टिट्यूट डायरेक्टर, मेलिओरा किडनी एंड यूरोलॉजी इंस्टिट्यूट, चंडीगढ़, कहते हैं, “दिल की बीमारियां, मधुमेह, अन्य समस्याओं के कारण कई मरीज पारंपरिक सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होते। ऐसे मरीज आधुनिक तकनीकों से लाभ उठा सकते हैं। यूरोलिफ्ट (UroLift) जैसी प्रक्रियाएं लोकल एनेस्थीसिया में की जा सकती हैं, इन में रक्तस्राव का खतरा (bleeding risk) कम होता है और रिकवरी तेज़ होती है।”
किन मरीजों के लिए MISTs उपयुक्त हैं?
डॉ. विकास सिंह, कंसलटेंट यूरोलॉजिस्ट एंड यूरो- ऑन्कोलॉजिस्ट, कोकिलाबेन धीरूभाई अम्बानी हॉस्पिटल, इंदौर, के अनुसार:
- लगभग 50 वर्ष के युवा मरीज, जो सेक्सुअल फंक्शन सुरक्षित रखना चाहते हैं
- बुजुर्ग मरीज, जिनमें पारंपरिक सर्जरी का जोखिम अधिक है
- वे मरीज जिनपर दवाएं असर नहीं कर रहीं या जो दवाइयां नहीं लेना चाहते लेकिन पारंपरिक सर्जरी से भी बचना चाहते हैं।
क्या MISTs सभी के लिए उपयुक्त हैं?
यह जानने का सब से अच्छा तरीका है कि मरीज किसी अनुभवी यूरोलॉजिस्ट से परामर्श करें। डॉक्टर मरीज की प्रोस्टेट स्थिति, समग्र स्वास्थ्य और अपेक्षाओं का मूल्यांकन कर तय करते हैं कि MISTs उन के लिए सही विकल्प हैं या नहीं।