भारतमाला सड़क परियोजना में मुआवजा घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। अब यह सामने आया है कि अधिग्रहण की सूचना मिलते ही जमीनों को रिश्तेदारों के नाम बांटने, दानपत्र तैयार कराने और स्टांप ड्यूटी बचाने का संगठित खेल खेला गया।
शिकायत और दस्तावेजों के अनुसार, जिम्मेदार लोकसेवकों ने पत्नी, सास-ससुर, साला-साली तक के नाम पर 0.0400 हेक्टेयर के छोटे-छोटे टुकड़े कराए ताकि अधिग्रहण में कई गुना ज्यादा मुआवजा मिल सके।
रायपुर जिले में अधिग्रहण की सूचना के बाद जमीनों को रिश्तेदारों के नाम बांटा गया। खसरा नंबर 1460 को 10, 1462 को 6 और 1482 को 5 हिस्सों में विभाजित किया गया।
अधिकांश टुकड़े 0.0400 हेक्टेयर के बनाए गए, ताकि ज्यादा मुआवजा मिल सके। आरोप है कि पत्नी, सास, ससुर, साला और साली तक के नाम पर नामांतरण कराए गए।
देहरागुड़ा में खरीदी गई 13 हेक्टेयर जमीन में से 6.50 हेक्टेयर जमीन दानपत्र से पत्नी के नाम ट्रांसफर की गई। शिकायतकर्ताओं ने इसे स्टांप ड्यूटी बचाने और कई गुना मुआवजा लेने का सुनियोजित खेल बताया है।
शिकायत में कहा गया है कि मुआवजा बढ़ाने के लिए पूरा परिवार खातेदार बना दिया गया। 0.0400 हेक्टेयर के टुकड़ों में जमीन पत्नी, सास, ससुर, साला, साली और रिश्तेदारों के नाम दर्ज कराई गई। कई नामांतरण आशय पत्र जारी होने के तुरंत बाद हुए।
आरोप है कि जमीन का वास्तविक उपयोग कृषि नहीं बल्कि अधिग्रहण मुआवजा कमाने के लिए किया गया। दस्तावेजों में यह भी सामने आया है कि 20 जून 2021 को दानपत्र कराया गया और 26 जून 2021 तक नामांतरण पूरा हो गया। शिकायतकर्ता कृष्णकुमार साहू ने बताया कि राजस्व विभाग की मिलीभगत के बिना इतनी तेजी संभव नहीं थी।