कर्नाटक पुलिस विभाग में पारदर्शिता और अनुशासन को लेकर एक बहुत बड़ा और सख्त फैसला लिया गया है। अब राज्य का कोई भी आम पुलिसकर्मी अपनी मर्जी से न तो मीडिया से बात कर पाएगा और न ही सोशल मीडिया पर पुलिस से जुड़ी कोई जानकारी शेयर कर सकेगा। इस संबंध में कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (DGP) डॉ. एमए सलीम ने एक कड़ा आदेश जारी किया है।
अब कौन करेगा मीडिया से बात?
कर्नाटक डीजीपी की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब पुलिस की तरफ से आधिकारिक बयान या जानकारी देने का हक सिर्फ कुछ चुनिंदा और तय अधिकारियों के पास ही होगा। ये अधिकारी राज्य, रेंज, शहर, जिला और स्पेशल यूनिट के स्तर पर पहले से तय होंगे।
इनके अलावा, बाकी सभी पुलिसकर्मियों पर पाबंदियां रहेंगी कि बिना लिखित इजाजत के कोई बयान या इंटरव्यू नहीं दे सकेंगे। मीडिया की किसी डिबेट या चर्चा में हिस्सा नहीं ले पाएंगे और मीडिया को ऑफ-द-रिकॉर्ड या अंदाजे के आधार पर कोई जानकारी नहीं दे सकेंगे।
सोशल मीडिया पर क्या-क्या शेयर करने पर लगी रोक?
इसके अलावा पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी कर्नाटक डीजीपी ने आदेश जारी किए हैं। इसके तहत पुलिसकर्मी अपने पर्सनल या ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट पर बिना मंजूरी के ये चीजें पोस्ट या फॉरवर्ड नहीं कर पाएंगे।
- चल रही जांच की कोई भी जानकारी।
- खुफिया इनपुट या ऑपरेशन का प्लान।
- क्राइम सीन (वारदात की जगह) की तस्वीरें।
- एफआईआर की कॉपी या गवाहों के बयान।
- पुलिस विभाग के अंदरूनी और सरकारी दस्तावेज।
क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?
कर्नाटक DGP डॉ. एम.ए. सलीम के मुताबिक, कई बार अधूरी या संवेदनशील जानकारी बाहर आने से चल रही जांच प्रभावित होती है। इससे अदालती कार्यवाही पर असर पड़ सकता है, लोगों की प्राइवेसी का उल्लंघन होता है और समाज में गलत अफवाहें फैलने का डर रहता है। इन्हीं सब बातों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
नियम तोड़ने पर होगी कड़ी कार्रवाई
इसके साथ ही आदेश में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर किसी भी पुलिसकर्मी ने इन नियमों का उल्लंघन किया, तो इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा। ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ न सिर्फ विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी एक्शन भी लिया जा सकता है।
इमरजेंसी में मिलेगी थोड़ी छूट
गौरतलब है कि इस आदेश में एक राहत भी दी गई है। अगर कोई आपातकालीन स्थिति जैसे- कोई आपदा, रेस्क्यू ऑपरेशन (बचाव कार्य), ट्रैफिक डायवर्जन या कानून-व्यवस्था से जुड़ा कोई बड़ा मामला हो, तो फील्ड पर तैनात अधिकारी जनता की भलाई के लिए सीधे जरूरी जानकारी दे सकते हैं। लेकिन, इसके लिए भी उन्हें पहले से तय प्रवक्ता को सूचित करना होगा।