स्कूलों में नौंवीं कक्षा में कला विषय की पढ़ाई करने वाले छात्र अब कला के साथ दृश्य कला, संगीत, नृत्य व रंगमंच जैसी कला की विधाएं भी सीखेंगे और पढ़ेंगे।
इस दौरान उन्हें भीमबेटका गुफा, सांची स्पूत, चोल काल और होयसाल काल की चित्रकारी व मूर्तिकला भी सिखाया जाएगा।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद ( एनसीईआरटी) ने नौंवी कक्षा में पढ़ाए जाने वाली कला विषय के लिए मधुरिमा नाम से एक नई पाठ्यपुस्तक तैयार की है।
जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सीबीएसई सहित सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में पढ़ाई जाएगी।
एनसीईआरटी ने इस पाठ्यपुस्तक का निर्माण नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की सिफारिशों के अनुरूप किया है। जिसमें छात्रों को भारतीय कला की समृद्ध सांस्कृतिक व विरासत से जोड़ने की पहल की गई है।
इस दौरान छात्रों को नाट्यशास्त्र, कैलाश व उन्नाकोटीश्वर मंदिर और प्राचीन अजंता गुफाओं के भित्ति चित्र आदि की पढ़ाया और सिखाया जाएगा।
एनसीईआरटी से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक इसके जरिए छात्र अपनी कलाकृतियों से परिचित और उससे रूबरू हो सकेंगे।
भारत मंडपम में लगी नटराज मूर्ति पर छात्रों को शोध के लिए किया जाएगा प्रेरित
देश में कांस्य मूर्तिकला का लंबा इतिहास रहा है। ऐसे में छात्रों को कला की पढा़ई के दौरान इससे विशेष रूप से परिचित कराया जाएगा।
इसके साथ ही उन्हें भारत मंडपम में स्थित नटराज मूर्ति पर शोध के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। जिसे लॉस्ट-वैक्स प्रक्रिया का उपयोग करके बनाया गया था।
पाठ्यपुस्तक में संगीत से संबंधित विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को समझाया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर छात्र यह अनुभव कर सकेंगे कि वाद्य यंत्र बनाना हमें ध्वनि के मूल सिद्धांतों को समझने में कैसे मदद करता है, साथ ही यह भी कि संगीत वाद्य यंत्र बनाने में भौतिकी की गहरी समझ भी शामिल होती है।