भारत और पांच उत्तरी यूरोपीय देशों फिनलैंड, आइसलैंड, नार्वे, स्वीडन व डेनमार्क के संगठन नार्डिक ने आपसी संबंध को ग्रीन टेक्नोलॉजी व इनोवेशन रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया है।
इसकी वजह से माना जा रहा है कि पर्यावरण सुरक्षा, जल संरक्षण, सौर ऊर्जा जैसे अन्य उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्र में इन देशों की कंपनियां अब ज्यादा खुल कर भारत में निवेश करेंगी।
उक्त फैसला ओस्लो में पीएम मोदी और पांचों देशों के प्रधानमंत्रियों की अगुवाई में हुई तीसरे भारत-नार्डिक सम्मेलन में हुआ। पीएम मोदी ने इसे नार्डिक देशों के साथ भारत के संबंधों के नए स्वर्णिम युग की शुरुआत बताई।
मोदी ने इन सभी देशों के प्रधानमंत्रियों से अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी की हैं। नार्डिक क्षेत्र के देशों को आकर्षित करने की यह भारत की सबसे अहम पहल है। इस तरह की पहल दुनिया का कोई और देश नहीं कर रहा।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज हमने भारत और नार्डिक संबंधों को ग्रीन टेक्नोलॉजी और इनोवेशन स्ट्रेटेजिक पार्ट्नरशिप का स्वरूप देने का निर्णय लिया है।
इस ग्रीन टेक्नोलॉजी पार्ट्नरशिप से, हम आइसलैंड की जियो-थर्मल व मछली पालन, नार्वे की सामुद्रिक आर्थिकी और आर्कटिक तथा सभी नार्डिक देशों की समुद्र विज्ञान व सतत विकास के विशेषज्ञों को भारत के स्केल (विशाल बाजार व प्रतिभा) के साथ जोड़कर, पूरे विश्व के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित करेंगे।
भारत और नार्डिक देश साथ मिलकर वैश्विक व्यवस्था को बल देते रहेंगे- मोदी
पीएम ने आगे कहा कि वैश्विक तनाव और संघर्ष के इस दौर में, भारत और नार्डिक देश साथ मिलकर एक नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को बल देते रहेंगे।
चाहे यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हम संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और शांति के प्रयासों का समर्थन करते रहेंगे। हम इस बात पर सहमत हैं कि बहुदेशीय संस्थानों का तत्काल सुधार आवश्यक है। आतंकवाद पर हमारा स्पष्ट और एकजुट रुख है- कोई समझौता नहीं, कोई दोहरे मापदंड नहीं।
इस दौरान आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रून फ्रोस्टाडाटिर ने कहा,“मुझे आज सुबह पीएम मोदी के साथ अपनी पहली द्विपक्षीय बैठक करने का अवसर मिला, जो हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण बैठक थी क्योंकि हमारे दोनों देशों के बीच बताने लायक एक शानदार कहानी है।
यह शिखर सम्मेलन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण समय पर आया है, जहां हम यह दिखा सकते हैं कि भले ही हम नॉर्डिक देश और भारत के रूप में मीलों दूर हैं और आइसलैंड जैसे छोटे देश का स्केल और आकार अलग है, फिर भी कई चीजें हमें एक साथ जोड़ती हैं।’
बाद में विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जार्ज ने बताया कि नार्डिक देशों के नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन दोहराया।
भारत नार्डिक देशों के साथ पिछले एक दशक से संबंधों को गढ़ने में लगा है। एक दशक में इन देशों के साथ भारत का द्विपक्षीय कारोबार चार गुणा बढ़ चुका है। इन देशों से भारत में होने वाला निवेश 200 गुणा हो चुका है। इन देशों के फंड भारत में जम कर निवेश कर रहे हैं।
भारत इन फंड्स को आकर्षित करने की कई कोशिशें भी कर रहा है। अक्टूबर 2025 में भारत ने नार्वे, आइसलैंड और अन्य एफ्टा देशों के साथ कारोबारी व आर्थिकी साझेदारी समझौते को लागू किया है। इसके बाद भारत-यूरोपियन यूनियन मुक्त कारोबार समझौता किया है, जिसमें डेनमार्क, फिनलैंड, और स्वीडन भी भागीदार हैं।
अपने भाषण में पीएम मोदी ने यह बताया कि नार्डिक देशों में भी संबंध शब्द का वहीं मतलब होता है जो भारत में होता है।
मोदी ने कहा कि वैसे तो हम सभी अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं। लेकिन कभी-कभी एक शब्द भी हमारी परस्पर संबंधों को रेखांकित करने के लिए काफी होता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को नार्वे की अपनी यात्रा और ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नार्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद रोम के लिए रवाना हो गए। नार्वे की बेहद फलदायी यात्रा का समापन हुआ।