नीदरलैंड की एक अदालत ने सोमवार को सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के विरोधियों को प्रताड़ना देने और दुष्कर्म करने के आरोप में 58 वर्षीय सीरियाई नागरिक रफीक को 26 साल की जेल की सजा सुनाई। अदालत ने इसे मानवता के विरुद्ध अपराध करार दिया।
रफीक 2013-2014 के दौरान पश्चिमी सीरिया के सलामियह में नेशनल डिफेंस फोर्स (NDF) की पूछताछ इकाई का प्रमुख था। अर्धसैनिक बल NDF ने असद सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को बेरहमी से कुचला था।
मानवता के विरुद्ध अपराध का मामला
अदालत के अनुसार, पीड़ितों को हथकड़ियां लगाई जाती थीं, आंखों पर पट्टी बांध दी जाती थी। उन्हें लाठियों, लातों और अन्य चीजों से पीटा जाता था।
कई मामलों में उन्हें कार के टायर में मोड़कर रखा जाता, उल्टा लटकाया जाता और बिजली के झटके दिए जाते थे। साथ ही उन्हें नग्न होने के लिए मजबूर किया जाता था।
अदालत ने रफीक को आठ पीड़ितों के खिलाफ 19 मामलों में मानवता के विरुद्ध अपराध का दोषी पाया। इनमें कई पीड़ितों के साथ यौन शोषण और एक पीड़ित के साथ बलात्कार भी शामिल है।
जजों ने कहा, ‘आरोपी ने बार-बार डर, धमकी, दर्द, निराशा और बेबसी का माहौल बनाया। अपराधों की असाधारण गंभीरता और पीड़ितों की पीड़ा को देखते हुए 26 वर्ष की सजा उचित है।’
यूनिवर्सल ज्यूरिस्डिक्शन का इस्तेमाल
यह पहली बार है जब नीदरलैंड में किसी व्यक्ति पर मानवता के विरुद्ध अपराध के तहत यौन हिंसा का मुकदमा चला और दोषसिद्धि हुई। रफीक 2021 में नीदरलैंड पहुंचा था और उसे अस्थायी शरण मिली थी।
वह अपने परिवार के साथ मध्य शहर ड्रूटन में रह रहा था। एक गुप्त सूचना मिलने पर पुलिस ने तुरंत उसे गिरफ्तार कर लिया।
ट्रायल के दौरान रफीक ने सभी आरोपों से इनकार किया और उन्हें ‘साजिश’ बताया। उसके वकीलों ने दावा किया कि रफीक खुद मिलिशिया द्वारा प्रताड़ित किया गया था और वह पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस सिंड्रोम से पीड़ित है।
यूरोप में बढ़ती कार्रवाई
यूरोपीय देश अब सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान हुए अपराधों पर यूनिवर्सल ज्यूरिस्डिक्शन के तहत मुकदमे चला रहे हैं। फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, बेल्जियम और ऑस्ट्रिया में भी ऐसे मामलों की सुनवाई हो चुकी है। यह फैसला सीरिया में हुए युद्ध अपराधों के लिए न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।