न खजाने में हेराफेरी, न भगदड़ का डर… राम मंदिर से नासिक कुंभ तक AI से होगी निगरानी…

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद आकार लेने जा रही नई प्रबंधन व्यवस्था में एआई (यंत्रबुद्धि) की भूमिका भी महत्त्वपूर्ण रहने वाली है। मंदिर में आने वाले चढ़ावे से लेकर भीड़ प्रबंधन तक एआई का उपयोग किया जा सकता है।

अयोध्या के श्रीरामजन्मभूमि मंदिर प्रबंधन के लिए नया सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) का चयन करने के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति के एक सदस्य एवं शिर्डी साईं मंदिर न्यास के चार साल अध्यक्ष रहे डा.सुरेश हावरे का मानना है कि एआई का उपयोग मंदिर प्रबंधन में तो पारदर्शिता लाएगा ही, वहां के भीड़ प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध होगा।

कुछ दिनों पूर्व दैनिक जागरण से बात करते हुए डा.हावरे ने कहा था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सबसे बड़ी ताकत ही यही है कि वह कम से कम समय में बहुत बड़े डेटा को हैंडल कर सकता है।

अपनी इस खूबी के कारण वह गोदामों या मंदिर परिसर में कहीं से भी सामान चोरी होने की प्रक्रिया को भांप लेता है और तुरंत अलर्ट करता है। इसलिए इसका उपयोग न सिर्फ अयोध्या के राममंदिर में बल्कि देश के सभी बड़े मंदिरों में किया जा सकता है।

वह कहते हैं कि मान लीजिए किसी मंदिर में 200 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। एआई इन सभी कैमरों का विश्लेषण करता है। अगर आप एक कैमरे में दिखे, फिर दूसरे या तीसरे में भी दिखे, तो सॉफ्टवेयर उन अतिरिक्त प्रविष्टियों को हटाकर आपको केवल एक ही बार गिनेगा। इससे 99.99 प्रतिशत तक सटीक गिनती मिल सकती है।

भीड़ में चोर, जेबकतरे या लुटेरे भी घुसते हैं। पुलिस के पास इनके फोटो और रिकॉर्ड होते हैं। यदि हम ये तस्वीरें सीसीटीवी के सॉफ्टवेयर में डाल दें, तो एआई भीड़ में से उन चेहरों की पहचान करके प्रबंधन या पुलिस प्रशासन को उनका सटीक लोकेशन बता देगा। जिससे उसे पकड़कर कोई चोरी या कोई दुर्घटना होने से रोका जा सकता है।

हावरे कहते हैं कि एआई का बड़ा उपयोग भीड़ नियंत्रण में है। यह पूरे परिसर को मैप करता है कि कहाँ भीड़ ज्यादा है और कहां कम। जहां भगदड़ की स्थिति बन सकती है, वहां यह प्रबंधन तंत्र को पहले ही सूचित कर देता है।

यह वीआईपी मूवमेंट के समय भक्तों को सही जगह रोकने और भीड़ को अनियंत्रित होने से बचाने के लिए दिशा-निर्देश (जैसे – कौन सा द्वार खोलना है, कौन सा बंद रखना है) भी तय कर सकता है।

ऐसी लगभग 40-50 चीजें हैं जो एआई मंदिर प्रबंधन में कर सकता है। यह तो स्थायी मंदिरों की व्यवस्था हुई। इसके अलावा एआई का उपयोग अयोध्या के सावन झूला मेला, परिक्रमा मेला, प्रयागराज, हरिद्वार कुंभ में भी किया जा सकता है।

नासिक कुंभ में भी AI उपयोग की बन रही योजना

महाराष्ट्र सरकार 2027 में होने जा रहे नासिक कुंभ में भी बड़े पैमाने पर एआई का उपयोग करने की योजना बना रही है। ताकि वहां इसकी मदद से सुरक्षा एवं डिजास्टर मैनेजमेंट किया जा सके। बता दें कि 2003 के नासिक सिंहस्थ कुंभ में राम घाट के पास भगदड़ बचने से कई श्रद्धालुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

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