तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी लोकसभा सदस्यों द्वारा विलय की घोषणा से पहले नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी आफ इंडिया (एनसीपीआई) का नाम बहुत कम लोगों ने सुना होगा। लेकिन, तृणमूल के बागी सांसदों ने जबसे एनसीपीआई का दामन थामा है, उसके बाद से यह कम जानी-पहचानी पार्टी अचानक राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गई है।
लोकसभा चुनाव लड़े बिना यह 20 सांसदों वाली पार्टी बन जाएगी। अगर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस विलय को मंजूरी दे देते हैं, तो एनसीपीआई लोकसभा में छठी सबसे बड़ी पार्टी होगी। सत्तारूढ़ राजग में यह भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी, जो तेदेपा (16 सांसद) और जदयू (12 सांसद) से काफी आगे होगी।
यह अलग बात है कि इस पार्टी के पास वर्तमान में सांसद या विधायक तो दूर, कोई स्थानीय निकाय पार्षद तक नहीं है। वित्त वर्ष 2022-23 के आखिर में एनसीपीआई के पास कैश के तौर पर सिर्फ 75 रुपये बचे थे। यह जानकारी पार्टी की ओर से चुनाव आयोग को सौंपी गई सालाना आडिट रिपोर्ट में सामने आई है।
कभी दिया था ‘दलबदलुओं को नकारें’ का नारा इसे एक राजनीतिक विडंबना ही कहेंगे कि तीन साल पहले जिस पार्टी ने ‘दलबदलुओं को नकारें’ का नारा दिया था, आज वही तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं का स्वागत कर रही है। इस दल ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में ‘अपने अधिकारों की रक्षा के लिए राजनीतिक दल-बदलुओं को नकारें’ के नारे के साथ चार उम्मीदवार उतारे थे।
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी आफ इंडिया ने 2023 के त्रिपुरा चुनाव में चार सीटों–चावामानु, अंबासा, करमचारा और कैलाशहर से चुनाव लड़ा था। इन सीटों पर उसके उम्मीदवार या तो ‘नोटा’ से भी पीछे रहे या उन्हें ‘नोटा’ से बस कुछ ही ज्यादा वोट मिले। विधानसभा चुनाव में 536 वोट पाने वाले चावामानु से उम्मीदवार बरजेदा त्रिपुरा से जब प्रेट्र ने संपर्क किया तो उन्होंने तृणमूल के बागियों के विलय की खबर पर हैरानी जताई। कहा कि मैंने 2023 में चुनाव लड़ा था। अब तीन साल बाद क्या हुआ है?
बंगाल में रजिस्ट्रेशन, त्रिपुरा से चुनावी पारी की शुरुआत20 जनवरी, 2023 को एनसीपीआई को चुनाव आयोग में रजिस्टर किया गया था। इसे निबंधित गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का दर्जा दिया गया था। बंगाल में रजिस्टर्ड होने के बावजूद पार्टी ने त्रिपुरा में चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया। पार्टी को कुल 1.13 लाख रुपये का चंदा मिला।
पार्टी के दस्तावेज में शेवली कुंडू का नाम कोषाध्यक्ष के तौर पर दर्ज है। वह उन दो संस्थाओं में भी निदेशक हैं, जो उसी पते पर रजिस्टर्ड है, जहां पार्टी का पता है। इन तीनों संस्थाओं का रजिस्टर्ड पता बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर इलाके में है। पार्टी के अध्यक्ष उत्तमिया कुंडू हैं, जो शेवली कुंडू के पति हैं। एक फेसबुक पोस्ट में उत्तमिया कुंडू ने बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक तस्वीर शेयर की थी।