नौसेना ने दो मोर्चों की चुनौती के बीच बढ़ाई अपनी क्षमता, दुश्मन की गतिविधियों पर रखी जा रही सख्त नजर…

भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली किसी भी ‘दोतरफा’ (टू-फ्रंट) चुनौती का सामना करने के लिए अपनी ताकत को कई गुना बढ़ा लिया है।

नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने एक विशेष साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि भारत किसी देश विशेष को निशाना नहीं बना रहा, बल्कि अपने समुद्री हितों की पूर्ण सुरक्षा और एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

चीन की पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) नौसेना की बढ़ती मौजूदगी और पाकिस्तान के साथ उसके गहरे होते गठजोड़ के बीच, एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि हिंद महासागर अब ‘सहयोग के युग’ से निकलकर ‘कड़े मुकाबले के दौर’ में प्रवेश कर चुका है।

पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताएं व ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का पराक्रम चीन द्वारा पाकिस्तान की नौसेना को आधुनिक बनाने और उसे पनडुब्बियां सौंपने जैसी हरकतों पर भारतीय नौसेना की पैनी नजर है।

एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि भारत ने अपनी पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता, समुद्री डोमेन जागरूकता, पानी के भीतर निगरानी (अंडरवाटर सर्विलांस) और नेटवर्क-केंद्रित अभियानों को अत्यधिक मजबूत किया है।

नौसेना की आक्रामक युद्ध-तैयारी का उदाहरण देते हुए उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र किया। साल 2025 में नौसेना ने रणनीतिक जलक्षेत्र में करीब 11 हजार जहाजी दिन और 50 हजार से अधिक उड़ान घंटे पूरे कर अभूतपूर्व सक्रियता दिखाई।

इस ऑपरेशन के दौरान जब भारत ने उत्तरी अरब सागर में अपना कैरियर बैटल ग्रुप तैनात किया, तो पाकिस्तानी नौसेना अपने बंदरगाहों या मकरान तट के पास ही दुबकने को मजबूर हो गई। इस आक्रामक रुख ने न केवल भारत की सैन्य ताकत को दिखाया, बल्कि पाकिस्तान की समुद्री अर्थव्यवस्था की कमर भी तोड़ दी।

युद्ध क्षमता बढ़ाने को ‘नेवल थियेटर कमांड’ की वकालत

पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्षों का हवाला देते हुए नौसेना प्रमुख ने रेखांकित किया कि समुद्री सुरक्षा का सीधा संबंध देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती से है।

उन्होंने तीनों सेनाओं (थल, नभ, जल) और तटरक्षक बल की क्षमताओं को मिलाकर एक समर्पित ‘नेवल थियेटर कमांड’ बनाने की पुरजोर वकालत की।

उन्होंने स्पष्ट किया कि थियेटर कमांड का गठन केवल प्रशासनिक फेरबदल के लिए नहीं, बल्कि देश की वास्तविक युद्ध क्षमता और परिचालन प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए होना चाहिए, जिसमें समुद्री वास्तविकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले।

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