प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
शारदीय नवरात्रि का हर एक दिन बेहद ही खास है। नवरात्रि के वैसे तो हर एक दिन का विशेष महत्व है। हर एक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है।
वहीं दुर्गा अष्टमी और नवमी की पूजा को सबसे पवित्र माना जाता है। कई लोग पूरी नवरात्रि उपवास रखते हैं। कुछ लोग पहली और अष्टमी का उपवास रखकर संकल्प लेते हैं।
पूरी नवरात्रि व्रत रखने वाले लोग अष्टमी या फिर नवमी में कन्या पूजन करके अपना उपवास को खोलते हैं।
अगर आप पहली बार अष्टमी की पूजा करने वाले हैं तो इसमें लगने वाली सामग्री को एक बार नोट कर लें ताकि ऐन मौके पर हड़बड़ी ना करनी पड़ी।
अष्टमी और नवमी की पूजा सामग्री
1. लोहे या स्टील का हवन कुंड
2. हवन सामग्री
3. आम की लकड़ी
4. शुद्ध देसी घी
5. कपूर
6. धूपबत्ती
7. शहद
8. कलावा
9. गंगाजल
10. पान और आम के पत्ते
11. पांच फल
12. पेड़ा
13. चंदन
14. सुपारी
15. लौंग
16. चावल
17. लाल कपड़ा/चुनरी
हवन का शुभ मुहूर्त
अष्टमी और नवमी के मुहूर्त पर ही हवन करेंगे तो इसके कई लाभ मिलेंगे। ज्योतिषी शास्त्र के हिसाब से दुर्गा अष्टमी का हवन मुहूर्त सुबह 6 बजकर 13 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 6 मिनट तक होगा।
इस बीच ही हवन करना शुभ होगा। वहीं नवमी में जिन लोगों को हवन करना है वो लोग 1 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 14 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 7 मिनट के मुहूर्त के बीच पूजा कर सकते हैं।
करें तुलसी के पौधे की पूजा
नवरात्रि में तुलसी के पौधे की पूजा करना शुभ माना जाता है। ध्यान रखें की तुलसी का पौधा हमेशा ईशान कोण में ही हो।
पूरी नवरात्रि तुलसी के पौधे के नीचे दीया जलाएं। सुबह-सुबह नहाने के बाद तुलसी के पौधे पर जल अर्पित करना शुभ होगा।