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शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व अब समापन की ओर है।
30 सितंबर 2025, मंगलवार को नवरात्रि की अष्टमी है। नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां महागौरी के पूजन का विधान है।
अष्टमी तिथि पर मां महागौरी के पूजन के साथ हवन व कन्या पूजन का भी अत्यंत शुभ माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अष्टमी तिथि पर मां महागौरी का शुभ मुहूर्त में पूजन करने से भक्त को शुभ फलों की प्राप्ति होती है, जबकि राहुकाल समेत कुछ अशुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ की मनाही होती है।
जानें मां महागौरी की किन मुहूर्त में न करें पूजा व कन्या पूजन की आसान विधि।
अष्टमी तिथि पर हवन का अभिजित मुहूर्त: अष्टमी तिथि पर हवन का अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।
अष्टमी पर इन मुहूर्त में न करें मां महागौरी व कन्या पूजन: ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल, यमगण्ड व गुलिक काल समेत कुछ मुहूर्त पूजा-पाठ के लिए उत्तम नहीं माने गए हैं। जानें अष्टमी तिथि पर बनने वाले अशुभ मुहूर्त।
राहुकाल- दोपहर 03:09 बजे से शाम 04:39 बजे तक।
यमगण्ड- सुबह 09:12 बजे से सुबह 10:41 बजे तक।
आडल योग- सुबह 06:13 बजे से सुबह 06:17 बजे तक।
दुर्मुहूर्त- सुबह 08:36 बजे से सुबह 09:24 बजे तक।
गुलिक काल- दोपहर 12:11 बजे से दोपहर 01:40 बजे तक।
कन्या पूजन की सरल विधि- नवरात्रि की अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्याओं को पूजन के लिए आदरपूर्वक आमंत्रित किया जाता है। घर पर उन्हें सम्मानपूर्वक आसन पर बिठाते हैं और उन्हें पैरों को धुलते हैं। इसके बाद कन्याओं को हलवा, पूड़ी व चने आदि का भोजन कराते हैं। इसके बाद उन्हें श्रद्धानुसार दक्षिणा देते हैं और पांव छूकर आशीर्वाद लेते हैं। अंत में कन्याओं की सम्मानपूर्वक विदाई करते हैं।