लेह में हुई हिंसा के बाद गिरफ्तार किए गए जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने तीन सदस्यीय एडवाइजरी बोर्ड को बताया है कि उनके बयानों के गलत मतलब निकाले गए और तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।
वांगचुक की गिरफ्तारी की समीक्षा करने के लिए तीन सदस्यों का बोर्ड बनाया गया है। शुक्रवार को बोर्ड के साथ बैठक के दौरान सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो भी मौजूद थीं।
गीतांजलि ने बताया, सोनम वांगचुक ने कहा कि किसि तरह से उन्हें गैरकानूनी तरीके से एनएसए के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
उन्होंने बताया कि उनके वीडियो से उनके बयान निकाले गए और उनके गलत अर्थ पेश किए गए। ट्रांसलेटर ने भी इसे मनमाने ढंग से पेश किया। वीं सीआरपीएफ और लोगों के बीच हुई झड़प में जबरन उनका नाम शामिल कर दिया गया।
गीतांजलि ने कहा कि वांगचुक को इस तरह से गिरफ्तार करके केवल लोकतंत्र का मजाक बनाया गया है। हालांकि वांगचुक ने इतना ही कहा कि इंसाफ के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं है।
उन्होंने कहा कि एक दिन सत्य की ही विजय होगी। बता दें कि वांगचुक पिछले एक महीने से जोधपुर की जेल में बंद हैं। उन्हें 26 सितंबर को एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया था। लेह में सीआरपीएफ के साथ झड़प में चार लोगों की मौत के बाद उनपर ऐक्शन लिया गया था।
लेह प्रशासन ने तीन सदस्यों का एक बोर्ड बनाकर वांगचुक कि गिरफ्तारी की समीक्षा करने का फैसला किया। इसमें जस्टिस एमके हांजुरा (रिटायर्ड), जस्टिस मनोज परिहार और स्पांजेज आंगमो शामिल हैं।
कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सदस्य सज्जाद कारगिली ने कहा कि सोनम वांगचुक पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्हें गलत तरीके से एक महीने से जेल में रखा गया है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से लद्दाख के लोगों में लोकतंत्र के प्रति विश्वास कम हो जाएगा। हम उनकी तत्काल रिहाई की मांग करते हैं।
हिंसक झड़पों की न्यायिक जांच शनिवार से शुरू हो गई है और इस दौरान पीड़ितों को जांच पैनल के सदस्यों के समक्ष अपनी गवाही दर्ज कराने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
केंद्र ने लेह में हुई हिंसक झड़पों की उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कराए जाने की 17 अक्टूबर को घोषणा की थी। यह लद्दाख के प्रदर्शनकारी समूहों की एक प्रमुख मांग थी।