मुंगेली : विशेष लेख : मत्स्य पालन बना समृद्धि का नया आधार…

मत्स्य बीज उत्पादन, प्रशिक्षण, रोजगार सृजन से मत्स्य पालकों की आय में हुई वृद्धि

750 से अधिक हितग्राहियों को वैज्ञानिक मत्स्य पालन तथा आधुनिक तकनीकों का दिया प्रशिक्षण

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले मुंगेली जिले में मत्स्य पालन अब केवल सहायक व्यवसाय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला प्रमुख आजीविका का माध्यम बन चुका है।

राज्य एवं केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में मत्स्य उत्पादन, मत्स्य बीज उत्पादन, प्रशिक्षण, रोजगार सृजन तथा मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि हुई है। मत्स्य पालन विभाग के सहायक संचालक श्री आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि स्पॉन उत्पादन में वर्ष 2024-25 के लक्ष्य 450 के विरुद्ध 451 तथा वर्ष 2025-26 में 500 के लक्ष्य के विरुद्ध 501 स्पॉन का उत्पादन किया गया। मत्स्य बीज उत्पादन में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई, जिससे जिले के मत्स्य पालकों को गुणवत्तायुक्त बीज समय पर उपलब्ध हो सका।

          मत्स्य पालन विभाग द्वारा किसानों एवं युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। 10 दिवसीय एवं 03 दिवसीय प्रशिक्षणों के माध्यम से 750 से अधिक हितग्राहियों को वैज्ञानिक मत्स्य पालन, तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज उत्पादन तथा आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। अध्ययन भ्रमण कार्यक्रमों से मत्स्य पालकों को अन्य राज्यों की सफल परियोजनाओं से सीखने का अवसर भी मिला। मत्स्य पालन प्रसार योजनाओं के अंतर्गत मौसमी तालाबों में स्पॉन संवर्धन, नाव-जाल वितरण, झींगा पालन, फिंगरलिंग संचयन तथा फुटकर मछली विक्रय योजनाओं का प्रभावी संचालन किया गया। इन योजनाओं ने छोटे एवं सीमांत मत्स्य पालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

युवाओं के लिए रोजगार का माध्यम

         एक्वाकल्चर योजना के अंतर्गत तालाब पट्टा आवंटन के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्ष 2026-27 में भी इस योजना के तहत नए हितग्राहियों को लाभान्वित करने की प्रक्रिया जारी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
        प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत दुर्घटना बीमा, अल्प अवधि बचत सह राहत, पॉण्ड लाइनर सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ हजारों मत्स्य पालकों तक पहुंचाया गया है। जिले में 05 हजार 530 मत्स्य पालकों को दुर्घटना बीमा योजना से सुरक्षा प्रदान की गई है, जिससे सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी मजबूत हुआ है।

सहकारिता से मिली नई ताकत

        केंद्र सरकार की सहकार से समृद्धि पहल के अंतर्गत जिले में 26 मत्स्य सहकारी समितियों का गठन किया गया है, जिनसे 315 सदस्य मत्स्य व्यवसाय से जुड़े हैं। इससे सामूहिक उत्पादन, विपणन और आय में वृद्धि के नए अवसर बने हैं।

बायोफ्लॉक तकनीक से बढ़ी आय

         मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने और कम स्थान में अधिक उत्पादन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वर्ष 2024-25 में 15 तथा 2025-26 में 12 बायोफ्लॉक इकाइयों की स्थापना की गई। इस आधुनिक तकनीक से एक इकाई में वार्षिक उत्पादन लगभग 2,500 किलोग्राम से बढ़कर 7,500-8,000 किलोग्राम तक पहुंच गया है। इससे मत्स्य पालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता जिला

         मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जिला मत्स्य उत्पादन एवं मत्स्य व्यवसाय के क्षेत्र में निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग, आधुनिक प्रशिक्षण, सहकारी मॉडल और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलकर जिले को मत्स्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र किसानों और युवाओं के लिए आय एवं रोजगार का और भी बड़ा माध्यम बनने की उम्मीद है।

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