मध्य प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में वेदर सिस्टम एक्टिव है। इसके असर से पिछले 24 घंटों के दौरान भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम और उज्जैन संभागों के अधिकांश जिलों में बारिश दर्ज की गई। वहीं ग्वालियर, जबलपुर और सागर संभागों में अनेक स्थानों पर तथा चंबल, रीवा और शहडोल संभागों में कहीं-कहीं वर्षा हुई। मौसम विभाग ने सोमवार को प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है।
यहां हुई वर्षा
मौसम विभाग के अनुसार सोमवार सुबह साढ़े आठ बजे तक पिछले 24 घंटों में राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में 124.6 मिलीमीटर (करीब 5 इंच) बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा झाबुआ में 86.1, राजगढ़ में 52.1, खंडवा में 30, रतलाम में 25, पचमढ़ी में 23, सीहोर में 18, हरदा में 17.8, धार में 17.7, आलीराजपुर में 16.4, भोपाल में 16 और टीकमगढ़ में 15 मिलीमीटर वर्षा हुई।
10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने सोमवार को रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, झाबुआ, रतलाम, उज्जैन, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच और गुना में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में 64.5 से 115.5 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है। इसके साथ ही भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं का अलर्ट है।
इन जिलों में पड़ सकती हैं बौछारें
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बड़वानी, आलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर और सागर जिलों में अनेक स्थानों पर बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है।
वहीं बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पांढुर्णा में कुछ स्थानों पर वर्षा हो सकती है। सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया और मैहर में कहीं-कहीं बारिश के आसार हैं।
राजस्थान-गुजरात क्षेत्र में कम दबाव का असर
मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और उससे लगे गुजरात क्षेत्र व दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश में बना कम दबाव का क्षेत्र अब दक्षिण-पूर्वी राजस्थान तथा उससे लगे उत्तर गुजरात पर केंद्रित है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है और ऊंचाई के साथ दक्षिण की ओर झुका हुआ है।