हरियाणा के रोहतक के सेक्टर 34 स्थित एक साधारण से परिवार में इन दिनों खुशियों का माहौल है। ब्रिटेन में रहने वाले दहिया परिवार की खास उपलब्धि इसका कारण है।
परिवार के दो सदस्य परवीन रानी और उनके बेटे तुषार कुमार ब्रिटेन में मेयर चुने गए हैं। ये दोनों भारतीय मूल के पहले प्रवासी हैं, जिन्होंने लेबर पार्टी से जुड़कर सामुदायिक कार्यों के जरिए राजनीति में अपनी जगह बनाई है।
23 वर्षीय तुषार कुमार एल्स्ट्रे और बोरहमवुड टाउन काउंसिल के मेयर चुने गए हैं। वह ब्रिटेन में मेयर पद संभालने वाले भारतीय मूल के सबसे युवा व्यक्ति हैं। 20 साल की उम्र में ही काउंसलर चुने जाने के बाद तुषार के पास अब काफी अनुभव है।
किंग्स कॉलेज लंदन से राजनीति विज्ञान में स्नातक करने वाले तुषार अब यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से मास्टर्स की पढ़ाई के साथ-साथ मेयर पद की जिम्मेदारियों को भी संभालेंगे।
सामुदायिक सेवा बनी राजनीति का रास्ता
टीओआई के अनुसार, तुषार के राजनीति में आने की कहानी काफी प्रेरणादायक है। उन्होंने स्कूल के दिनों से ही विभिन्न चैरिटी संस्थाओं के साथ काम करना शुरू कर दिया था। सामुदायिक कार्यों के प्रति उनके समर्पण को देखकर ही स्थानीय लोगों ने उन्हें चुनाव लड़ने की सलाह दी थी।
इसके अलावा, उन्होंने ब्रिटेन में पैदा हुए भारतीय बच्चों को हिंदी सिखाने का काम भी किया, ताकि वे अपने दादा-दादी से बात कर सकें जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी।
मां परवीन रानी की प्रेरणादायक सफर
तुषार की मां परवीन रानी (45) को हर्ट्समेरे बोरो काउंसिल का मेयर चुना गया है। वह कहती हैं, “मैं जिस इलाके में रहती हूं, वहां श्वेत आबादी अधिक है। ऐसी जगह पर पहली एशियाई महिला के रूप में मेयर चुना जाना इस बात का प्रमाण है कि यदि आप जमीन से जुड़कर काम करते हैं, तो लोग आपको स्वीकार करते हैं।”
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय स्थानीय समुदाय के प्रति अपने काम, खासकर कोविड के दौरान की गई उनकी मदद को दिया। इसके अलावा, उन्होंने ब्रिटेन में पैदा हुए भारतीय बच्चों को हिंदी सिखाने का काम भी किया, ताकि वे अपने उन दादा-दादी से बात कर सकें जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी।
हरियाणा की बेटियों के लिए मिसाल
परवीन का मानना है कि हरियाणा को अक्सर कुछ सामाजिक कुरीतियों के लिए जाना जाता है, लेकिन वे राज्य की महिला एथलीटों जैसे गीता और बबीता फोगट का उदाहरण देकर कहती हैं, “मैं अपनी मेहनत से घर की महिलाओं के लिए एक मिसाल बनना चाहती हूं। मैं उन्हें यह विश्वास दिलाना चाहती हूं कि वे जो चाहें, कर सकती हैं।”
दो देशों में एक परिवार
दहिया परिवार 2013 में रोहतक से ब्रिटेन शिफ्ट हुआ था। तुषार बताते हैं कि शुरुआत में ब्रिटेन के माहौल और भाषा में ढलना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कड़ी मेहनत से खुद को साबित किया।
आज भी यह परिवार ब्रिटेन और भारत दो अलग-अलग देशों में रहने के बावजूद एक संयुक्त परिवार की तरह एकजुट है। रोहतक में रह रही तुषार की आंटी निर्मला देवी कहती हैं कि उन्हें अपने भतीजे के एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में विकसित होने पर बेहद खुशी है।