मानसून की रफ्तार हुई सुस्त, 25 वर्षों में 14वीं बार ऐसा हुआ; बारिश को लेकर राहत की उम्मीद…

देशभर में मानसून की रफ्तार सुस्त है। ऐसा 25 सालों के भीतर 14वीं बार है, जब मानसून देरी से आया। लेकिन यह कम बारिश का संकेत बिल्कुल नहीं है। क्योंकि, 14 बार में 7 बार ऐसा हुआ है, जब मानसून देरी से पहुंचा और उस दौरान सामान्य या उससे ज्यादा बारिश हुई।

दरअसल, 27 जून तक मानसून ने देश के सिर्फ 55% हिस्से को ही कवर किया है। मानसून महाराष्ट्र को कवर करते हुए शनिवार को मध्य प्रदेश और बिहार तक पहुंच गया। वहीं, इस बार मुंबई में मानसून 12 दिन की देरी से आया है।

24 साल बाद फिर मानसून में देरी

इसके पीछे की वजह अल नीनो बताया जा रहा है। इससे पहले साल 2002 में जून के अंत तक मानसून ने सिर्फ 50-55% हिस्सा कवर किया था। इस साल पूरे देश में मानसून 15 अगस्त तक कवर हुआ था। इस साल फिर जून के अंत तक देश के अधिकांश हिस्से बारिश के लिए तरस रहे हैं।

क्या सूखे पड़ने के हैं संकेत?

मानसून में देरी की वजह से ऐसा अनुमान जताया जा रहा है कि इस वर्ष सूखा पड़ सकता है। हालांकि, मानसून के मिजाज को लेकर अभी से निराश होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि, पिछले 25 सालों में 6 बार अल नीनो का असर रहा है, जिसमें से 5 बार सूखा या कम बारिश देखने को मिली।

लेकिन 2019 में अल नीनो के असर के बावजूद 10% ज्यादा बारिश हुई। यानी कुल मिलाकर आईएमडी की 2001-2025 मानसून सीजन के आकड़े की मानें तो मानसून का लेट होना हमेशा सूखे का कारण नहीं बनता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *