मानसून सत्र: आज पेश होंगे चार अहम विधेयक, परिसीमन के मुद्दे पर DMK ने संभाली कमान; शाह भी मोर्चे पर…

संसद के मानसून सत्र के आखिरी चार दिनों में परिसीमन विधेयक पर दोबारा दांव लगाने के लिए संख्या बल जुटाने की राजग की राजनीतिक पेशबंदी के बीच फिलहाल ‘तटस्थ’ द्रमुक के 22 लोकसभा सदस्यों की भूमिका सबसे निर्णायक हो गई है।

तृणमूल कांग्रेस व शिवसेना (यूबीटी) में टूट के बाद राजग और विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए के वर्तमान संख्या बल को देखते हुए परिसीमन की नैया को सदन में पार कराने की पतवार इस समय लगभग द्रमुक के हाथ है। हालांकि विपक्ष के लिए शरद पवार की एनसीपी-एसपी का आइएनडीआइए के साथ बने रहना भी उतना ही जरूरी है।

द्रमक तथा एनसीपी-एसपी को लगातार टटोलते रहने के राजग सरकार के प्रयासों के बीच मानसून सत्र के बाकी दिन विपक्ष के लिए अपनी एकजुटता बनाए रखने के लिहाज से सबसे निर्णायक और चुनौतीपूर्ण हैं।

परिसीमन विधेयक पर संख्या जुटाने को लेकर पर्दे के पीछे जारी सरगर्मियों के बीच द्रमुक ने अपने रुझान का कोई स्पष्ट संकेत अभी तक नहीं दिया है।

संभवत: यही वजह है कि सरकार ने परिसीमन विधेयक को लोकसभा या राज्यसभा की सोमवार की कार्यसूची में शामिल नहीं किया है। हालांकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू महिला आरक्षण लागू करने की दलील देकर परिसीमन के मुद्दे पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से लेकर विपक्षी खेमे के तमाम दलों पर दबाब बनाने की कोशिशों में लगातार जुटे हैं।

जाहिर है कि विपक्षी खेमे में सेंध लगाए बिना सरकार के लिए परिसीमन विधेयक का मार्ग प्रशस्त करना संभव नहीं है। इसीलिए द्रमुक पर सरकार की निगाह है। कांग्रेस से गठबंधन टूटने के बाद एमके स्टालिन अब राष्ट्रीय राजनीति के बजाय तमिलनाडु में अपनी पार्टी के भविष्य को लेकर चिंतित हैं और उनकी इस चिंता में ही राजग सरकार अपने लिए उम्मीद देख रही है।

लोकसभा में राजग की वर्तमान संख्या 326 के करीब

सत्तापक्ष और विपक्ष के लोकसभा में वर्तमान संख्या बल पर गौर करें तो परिसीमन पर आर-पार की लड़ाई बिल्कुल निर्णायक मोड़ पर दिख रही है। लोकसभा में राजग के 293 सांसदों की पिछली संख्या में अब तृणमूल से टूटकर एनसीपीआई के तौर पर 20 सांसद और जुड़ गए हैं। शिवसेना (यूबीटी) से टूटकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए छह सांसदों के साथ राजग की कुल संख्या 319 पहुंच गई।

जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के चार सदस्यों और सात में से कुछ एक निर्दलीयों को मिलाकर राजग के पक्ष में संख्या बल 326 को पार कर गई है। इसमें अकाली दल का एक सांसद भी शामिल हैं जिसने परिसीमन पर दो दिन पहले ही राजग को समर्थन का एलान किया है। वाईएसआर कांग्रेस ने बीते अप्रैल में परिसीमन विधेयक पर लोकसभा में राजग का ही साथ दिया था।

परिसीमन बिल के लिए चाहिए 350-360 की संख्या

परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर पिछली बार सरकार 298 सांसदों का ही समर्थन ही जुटा पाई थी जो आवश्यक दो तिहाई बहुमत से काफी कम था। लोकसभा में अभी 540 सदस्य हैं और तीन सीटें असम की नौगांव, बंगाल की बशीरहाट तथा मेघालय की शिलॉन्ग खाली है।

परिसीमन विधेयक पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित सांसदों की संख्या का दो तिहाई का समर्थन जरूरी है। इसलिए संख्या बल का कम से कम 350-360 के बीच होना जरूरी है तभी सरकार इस विधेयक पर आगे बढ़ पाएगी। ऐसे में साफ है कि द्रमुक के 22 सांसदों की भूमिका सबसे अहम है। द्रमुक ढीली पड़ी तो सत्ता पक्ष के लिए चार-छह सांसदों की व्यवस्था बहुत मुश्किल नहीं होगी।

189 की संख्या के करीब विपक्ष

परिसीमन विधेयक पर सरकार को परास्त करने के बाद तृणमूल कांग्रेस तथा शिवसेना (UBT) की टूट के चलते 18वीं लोकसभा में विपक्ष अब तक की अपनी सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा का सामना कर रहा है।

द्रमुक के इंडी गठबंधन से अलग होने से यह चुनौती कहीं ज्यादा बढ़ गई है। अप्रैल में परिसीमन विधेयक के विरुद्ध लोकसभा में 230 सांसदों को गोलबंद करने वाले इंडी गठबंधन के पास इस समय करीब 179 सांसद हैं। इसमें आम आदमी पार्टी के तीन, एआईएमआईएम, बीटीपी, आजाद समाज पार्टी के एक-एक और चार निर्दलीय मिलाकर यह संख्या 189 पहुंच रही है।

इन सभी ने पिछली बार भी परिसीमन विधेयक के विरुद्ध विपक्ष का साथ दिया था। ऐसे में द्रमुक की अहम भूमिका के मद्देनजर दोनों तरफ से स्टालिन को साधने या मनाने की हरसंभव कोशिश हो रही है। संभवत: इसीलिए राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने रविवार को विपक्षी सांसदों को बड़ी संख्या में निलंबित कर विधेयकों को पारित कराने का इतिहास नहीं दोहराए जाने की बात कही।

सोमवार ये विधेयक होंगे पेश

लोकसभा में सोमवार को कई आवश्यक विधेयक पेश किए जाएंगे। इनमें न्यायाधिकरण सुधार विधेयक-2026 को अर्जुन राम मेघवाल, खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 को जी. किशन रेड्डी और केरल (नाम में बदलाव) विधेयक-2026 एवं राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक-2026 को अमित शाह पेश करेंगे।

जबकि राज्यसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल-2026 पर चर्चा होनी है। इसे निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। उच्च सदन में कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक-2026 पर भी विचार होना है।

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