असम के नगांव जिला एवं सत्र न्यायालय ने गुरुवार को 2018 के चर्चित अभिजीत नाथ-नीलोत्पल दास (अभि-नील) लिंचिंग मामले में फैसला सुनाते हुए 20 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
इससे पहले सोमवार (20 अप्रैल) को अदालत ने 45 आरोपियों में से 20 को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था, जबकि 25 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। आज सजा की घोषणा के साथ मामले का आठ साल लंबा कानूनी सफर समाप्त हो गया।
घटना क्या थी?
8 जून 2018 को गुवाहाटी के दो युवक अभिजीत नाथ (30 वर्षीय व्यवसायी) और नीलोत्पल दास (29 वर्षीय संगीतकार) कार्बी आंगलोंग जिले के डोकमोका इलाके के पंजुरी कचारी गांव से गुजर रहे थे।
सोशल मीडिया पर फैली झूठी अफवाह के कारण स्थानीय लोगों ने उन्हें बाल अपहरणकर्ता समझ लिया। गुस्साई भीड़ ने उनकी कार रोककर दोनों को बाहर खींचा और क्रूरता से पीट-पीटकर मार डाला।
पीड़ित बार-बार अपनी पहचान बताने और जान बचाने की गुहार लगा रहे थे, लेकिन भीड़ ने उनकी एक न सुनी। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पूरे असम और देशभर में भारी आक्रोश फैला था।
अदालत का फैसला
नगांव सेशंस कोर्ट के जज डी.जे. महंता ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 149 (सामान्य उद्देश्य), 143 (अवैध जमाव), 147 (दंगा), 186 और 332 (सरकारी कर्मचारी पर हमला) आदि के तहत दोषी पाया।
25 आरोपियों को सबूत न होने और कई गवाहों के मुकर जाने के कारण बरी कर दिया गया। बरी हुए आरोपियों को अन्य लंबित मामलों में जरूरत न होने पर रिहा करने के आदेश दिए गए हैं।
पीड़ित परिवारों ने फैसले का स्वागत किया है, लेकिन कई सदस्यों ने मुख्य दोषियों को फांसी की सजा की मांग की थी। कुछ परिवारों ने 25 लोगों के बरी होने पर निराशा जताई और आगे अपील करने की बात कही है।