प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
सनातन धर्म में संक्रांति तिथि का खास महत्व है। यह दिन पूर्णतया आत्मा के कारक सूर्य देव को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर साधक गंगा स्नान कर भगवान भास्कर की पूजा करते हैं। साथ ही जप-तप और दान-पुण्य करते हैं।
सूर्य देव की साधना करने से साधक को आरोग्यता का वरदान मिलता है।
ज्योतिष करियर संबंधी परेशानी को दूर करने के लिए सूर्य देव की उपासना करने की सलाह देते हैं। इससे कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है।
आइए, सूर्य देव के मिथुन राशि में गोचर करने की तिथि और शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं-
सूर्य राशि परिवर्तन
आत्मा के कारक सूर्य देव 14 जून तक वृषभ राशि में रहेंगे। इसके अगले दिन सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में गोचर करेंगे।
आसान शब्दों में कहें तो सूर्य देव 15 जून को दोपहर 12 बजकर 58 मिनट पर मिथुन राशि में गोचर करेंगे। इस राशि में सूर्य देव एक महीने तक रहेंगे। इसके बाद सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में गोचर करेंगे।
मेष संक्रांति शुभ मुहूर्त
सूर्य देव के राशि परिवर्तन करने की तिथि पर संक्रांति मनाई जाती है। इस प्रकार 15 जून को मिथुन संक्रांति मनाई जाएगी। इस दिन पुण्य काल दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 20 मिनट तक है।
वहीं, महा पुण्य काल दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 03 बजकर 19 मिनट तक है।
मेष संक्रांति शुभ योग
ज्योतिषियों की मानें तो मिथुन संक्रांति पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। मिथुन संक्रांति पर सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का संयोग शाम 07 बजकर 08 मिनट तक है।
साथ ही अभिजीत मुहूर्त का भी संयोग बन रहा है। इन योग में सूर्य देव की पूजा करने से साधक को मनोवांछित फल प्राप्त होगा।
पंचांग
- सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 23 मिनट पर
- सूर्यास्त – शाम 07 बजकर 20 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 02 मिनट से 04 बजकर 43 मिनट तक
- विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 41 मिनट से 03 बजकर 37 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त – शाम 07 बजकर 19 मिनट से 07 बजकर 39 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त – रात 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक