वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सैन्य शक्ति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि केवल आर्थिक शक्ति से किसी राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा करना संभव नहीं है।
सेंटर फार एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज द्वारा आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए एपी सिंह ने वेनेजुएला और इराक का उदाहरण दिया और कहा कि हमें यह समझना होगा कि सैन्य शक्ति ही राष्ट्रीय शक्ति का अंतिम मापदंड है।
सेना की मजबूती पर दिया जोर
वायुसेना प्रमुख ने कहा, “आर्थिक रूप से मजबूत होने पर भी कोई भी सुरक्षित नहीं रह सकता। हमारे अपने देश का उदाहरण लीजिए, एक समय में हम और चीन मिलकर विश्व के 60 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को नियंत्रित करते थे। लेकिन, इसके बावजूद हम पर कब्जा कर लिया गया और हमें उपनिवेश बना दिया गया।”
उन्होंने कहा, “वैसे तो कोई भी शक्ति महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतत: एक मजबूत सेना की आवश्यकता पड़ती ही है। यदि आपके पास सैन्य शक्ति नहीं है, तो कोई भी आपको अपने अधीन कर सकता है। वेनेजुएला और इराक इसके सबसे हालिया उदाहरण हैं। सैन्य शक्ति महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है, उस सैन्य शक्ति का उपयोग करने की इच्छा शक्ति।”
वायुसेना प्रमुख ने सशक्त सेना और उसे इस्तेमाल करने की इच्छा शक्ति पर बल देते हुए राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के एक दोहे का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा, “क्षमा शोभती उस भुजंग को, जिसके पास गरल हो/उसको क्या जो दंतहीन, विषहीन, विनीत, सरल हो। जब तक आपमें वह इच्छा शक्ति नहीं होगी, आप संयम बरतते रह सकते हैं। लेकिन, वह संयम कमजोरी समझी जाएगी। जब आप पर्याप्त रूप से मजबूत होते हैं और संयम बरतते हैं, तभी उसे क्षमता के रूप में देखा जाता है।”
मेक इन इंडिया को सराहा
एपी सिंह ने यह भी कहा कि भारत की सुरक्षा आवश्यकताएं अक्सर अपने पड़ोस में होने वाले घटनाक्रमों से प्रभावित होती हैं, जिससे कभी-कभी प्रतिक्रिया में निर्णय लेने की आवश्यकता होती है। उन्होंने आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए मेक इन इंडिया पहलों और अगली पीढ़ी की हथियार प्रणालियों के लिए रणनीतिक साझेदारियों पर तेजी से निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।