पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को उत्तरी कश्मीर के छह युवाओं को जन सुरक्षा अधिनियम के तहत बंदी बनाए जाने की कड़े शब्दों में आलोचना की।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में अब लोग किसी बात पर एतराज व्यक्त नहीं कर सकते, अगर करते हैं तो उन्हें जेल भेज दिया जाता है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला यह सब चुपचाप देखते रहते हैं। उन्होंने कहा कि पीडीपी जम्मू-कश्मीर में इस घुटन वाले माहौल को समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर की जनता को उसका हक व सम्मान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
अनंतनाग में पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वर्ष 2016 में पीडीपी ने अपने शासनकाल में 12 हजार युवाओं को पीएसए हटाया था। उन्होंने कहा कि यहां आज किसी को बोलने की इजाजत नहीं है।
उन्होंने कहा कि सोपोर में गत दिनों एक छात्र के साथ अध्यापक द्वारा कथित दुर्व्यवहार को लेकर स्थानीय युवाओं ने प्रदर्शन किया और उनमें से छह युवाओं को पीएसए क तहत बंद कर दिया गया। यह कहां का इंसाफ है। आज कश्मीर के सैंकड़ों युवा जेलों में बंद हैं।
उन्होंने कहा कि पीडीपी ने सत्ता में रहते हुए कश्मीर में शांति और सामान्य स्थिति की बहाली के लिए कई ठोस कदम उठाए। क्रास एलओसी ट्रेड और बस सेवा शुरू कराई, लोगों को हीलिंग टच के जरिए एक नई उम्मीद दी। हमने कश्मीर और कश्मीरियो के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया।
लेकिन अब यहां आम लोगों की सुनवाई नहीं है, लोगों की राजनीतिक-सामाजिक आकांक्षाओं को दबाया जा रहा है। विकास योजनाएं ठप पड़ी हैं, युवाओं में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, लेकिन मौजूदा सरकार लोगों की समस्याओं का हल करने के बजाय उनकी उपेक्षा कर रही है।