भारत में घरेलू निर्णय लेने में विवाहित महिलाओं की भागीदारी पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 89% महिलाएं अपने स्वास्थ्य की देखभाल, घर की बड़ी खरीदारी और रिश्तेदारों से मिलने-जुलने जैसे तीन प्रमुख फैसलों में सीधे तौर पर शामिल थीं।
15 से 49 वर्ष की विवाहित महिलाओं की यह भागीदारी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में काफी मजबूत देखी गई है। ग्रामीण इलाकों में यह 88% और शहरी क्षेत्रों में 91.4% रही। अखिल भारतीय स्तर पर पिछले कुछ सर्वेक्षणों से यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। NFHS-4 (2015-16) में यह 84% था, जो NFHS-5 (2019-21) में बढ़कर 88.7% हुआ और अब ताजा सर्वेक्षण में 89% तक पहुंच गया है।
बैंक खातों के इस्तेमाल के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता में सुधार
बैंक या बचत खातों का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या में बड़ा उछाल आया है। पिछले सर्वेक्षण में जहां 78.6% महिलाओं के पास अपना ऐसा बैंक खाता था जिसे वे खुद इस्तेमाल करती थीं, वहीं 2023-24 के इस ताजा सर्वे में यह आंकड़ा बढ़कर 89% हो गया है।
सकारात्मक बदलावों के बावजूद, आंकड़े कुछ गंभीर चुनौतियों की ओर भी इशारा करते हैं। मिसाल के तौर पर, सर्वेक्षण के समय पिछले 12 महीनों में काम करने वाली और उसके बदले नकद भुगतान पाने वाली महिलाओं का प्रतिशत महज 30.8% था।
हालांकि, यह NFHS-5 के 25.4% के मुकाबले थोड़ा बेहतर है। साल 2023-24 में नकद भुगतान पाने वाली महिलाओं का यह आंकड़ा शहरी क्षेत्रों में 29.8% और ग्रामीण क्षेत्रों में 31.2% दर्ज किया गया।
नसबंदी में बड़ा अंतर
फैमिली प्लानिंग के आंकड़े बताते हैं कि विवाहित महिलाओं (15-49 वर्ष) द्वारा गर्भनिरोधक तरीकों का इस्तेमाल NFHS-5 के 66.7% से बढ़कर अब 69.1% हो गया है। लेकिन जब बात स्थायी समाधान यानी नसबंदी की आती है, तो पुरुष और महिला के बीच एक बहुत बड़ी खाई दिखाई देती है।
NFHS-6 के अनुसार, देश में महिला नसबंदी का आंकड़ा जहां 36.5% है, वहीं पुरुष नसबंदी महज 0.5% पर सिमटी हुई है। पिछले सर्वेक्षण में यह आंकड़ा महिलाओं के लिए 37.9% और पुरुषों के लिए 0.3% था।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में परिवार नियोजन का हाल
नसबंदी के मामलों में ग्रामीण इलाकों की महिलाओं की हिस्सेदारी (38.1%) शहरी इलाकों (32.6%) की तुलना में काफी ज्यादा है। वहीं, पुरुषों के मामले में नसबंदी का ग्राफ दोनों ही जगहों पर बेहद निराशाजनक है, ग्रामीण क्षेत्रों में 0.5% और शहरी क्षेत्रों में 0.4% पुरुषों ने ही इसे चुना।
इसके अलावा, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं द्वारा किसी भी प्रकार के परिवार नियोजन के तरीकों के इस्तेमाल में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। शहरी क्षेत्रों में 69.6% और ग्रामीण क्षेत्रों में 68.9% विवाहित महिलाएँ गर्भनिरोधक तरीकों का उपयोग कर रही हैं।
सर्वेक्षण ने परिवार नियोजन की अनमेट नीड पर भी ध्यान आकर्षित किया है। वर्तमान में विवाहित महिलाओं (15-49 वर्ष) में यह जरूरत 8.5% पाई गई। यह समस्या शहरी क्षेत्रों (7%) की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों (9.1%) में अधिक है।