अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित प्रारंभिक शांति समझौते (एमओयू) पर सहमति बनने और उस पर ई-हस्ताक्षर होने के बाद पश्चिम एशिया में सभी पक्षों का ध्यान अब लेबनान में युद्धविराम पर टिक गया है।
स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने बताया कि समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधि शुक्रवार को लुजर्न स्थित बर्गेनस्टाक रिजार्ट में जुटेंगे।
आईएएनएस के अनुसार, ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रावांची ने बताया कि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से नाकेबंदी हटा ली है। तीन ईरानी टैंकर और दो अन्य जहाज दक्षिणी बंदरगाहों से गुजरे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार गिरी कच्चे तेल की कीमत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार दूसरे दिन जारी रहा। तेल की कीमत करीब दो प्रतिशत गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि दो दिनों में कुल गिरावट सात प्रतिशत तक पहुंच गई है।
ईरान ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका के साथ स्थायी शांति समझौते पर बातचीत शुक्रवार को शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद शुरू हो जाएगी। साथ ही उसने स्पष्ट किया कि व्यापक शांति व्यवस्था में लेबनान में युद्धविराम भी शामिल है और यह तभी संभव होगा जब इजरायली सेनाएं वहां से वापस जाएं।
होर्मुज में बनी हुईं आशंकाएं
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आगाह किया है कि लेबनान में इजरायली सेना की मौजूदगी मसौदे में बनी सहमति का उल्लंघन मानी जाएगी।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप भी इस मुद्दे पर इजरायल के रुख से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को अधिक जिम्मेदार नेता की तरह व्यवहार करने की सलाह दी।
मंगलवार को इजरायली हमले में चार लोगों की मौत हुई। साढ़े तीन महीने से होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव झेल रही शिपिंग कंपनियों के बीच समझौते की सफलता को लेकर अब भी आशंकाएं बनी हुई हैं।
बेरूत पर हमलों से नाराज दिखे ट्रंपन्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर से कुछ घंटे पहले बेरूत पर हुई इजरायली सैन्य कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील कूटनीतिक समय में ऐसे हमलों से समझौता खतरे में पड़ सकता था।
इजरायल की कार्रवाई पसंद नहीं आई: ट्रंप
ट्रंप ने कहा, ‘मुझे इजरायल की यह कार्रवाई बिल्कुल पसंद नहीं आई।’ उन्होंने यह भी कहा कि तेल अवीव इसलिए सुरक्षित है क्योंकि अमेरिका उसके साथ खड़ा है।
उनका यह बयान इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि इजरायल अमेरिका का गुलाम नहीं है और अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है।
ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू से उनके अच्छे संबंध हैं, लेकिन उन्हें कुछ अधिक जिम्मेदार होना होगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि हिजबुल्ला के खतरे से निपटने में सीरिया अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है। हालांकि इस पर सीरिया की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।