इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे में बीटेक के दूसरे साल के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली है। आईआईटी पवई कैंपस में छह महीने में आत्महत्या का यह तीसरा मामला है। इस मामले में उकसाने की एफआईआर दर्ज किया गया है। यह संस्थान में संभवतः पहला ऐसा मामला है।
पवई पुलिस ने छात्र के माता-पिता की शिकायत पर एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के प्राविधान भी लगाए हैं। शनिवार देर रात यह मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। 20 वर्षीय साहिल वाकोडे ऊर्जा विज्ञान विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्र थे।
शुक्रवार को दोपहर 2 से 4 बजे की परीक्षा के दौरान उन्हें मोबाइल फोन के साथ पकड़ा गया। आरोप है कि उन्होंने परीक्षा का प्रश्नपत्र एआई प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर जवाब मांगे थे। इसके बाद उन्हें अपने हॉस्टल रूम में मृत पाया गया।
एफआईआर में एनर्जी साइंस विभाग के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला का नाम दर्ज है। वे उस परीक्षा के इनविजिलेटर थे और हाल तक संस्थान के डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स भी रह चुके हैं। एफआईआर में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का भी जिक्र है। यह इस साल परिसर में तीसरी आत्महत्या की घटना है।
पिता ने आरोप लगाए हैं कि उनके बेटे को जातिसूचक शब्द बोले गए थे जिसके बाद वह काफी आहत हो गया और उसने यह कदम उठाया।
साहिल के पिता रविंद्र (मल्टीपर्पज को-ऑपरेटिव सोसायटी के पदाधिकारी) और मां सोनाली (सरकारी स्कूल शिक्षिका) ने आरोप लगाया कि बेटा पिछले तीन महीनों से प्रोफेसर द्वारा उत्पीड़न और जातिवादी टिप्पणियों का शिकार हो रहा था।
उन्होंने राजवाड़ी अस्पताल के पोस्टमॉर्टम सेंटर से सात घंटे से ज्यादा समय तक बेटे का शव लेने से इनकार कर दिया। रविंद्र ने कहा कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, मैं बेटे का अंतिम संस्कार नहीं करूंगा। वे इकलौते बेटे थे।
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के समझाने और जांच क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने के आश्वासन के बाद देर रात उन्होंने शव ले लिया। परिवार के वकील ने राज्य सरकार से विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने और एससी/एसटी अधिनियम के तहत मुआवजा तुरंत देने की मांग की है।
छात्रों का प्रदर्शन
बी.टेक स्टूडेंट के आत्महत्या करने के बाद, कई छात्र विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए और संस्थान के प्रशासन से जवाबदेही की मांग की।
एक छात्र ने कहा, ‘हमारे विरोध का कारण यह है कि आज हमारे कॉलेज में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली। इसीलिए हम विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए हैं – ताकि प्रशासन से जवाबदेही, पारदर्शिता और सवालों के जवाब मांग सकें।’
छात्र ने आगे कहा, ‘यह पहली घटना नहीं है। अकेले इस साल ऐसी चार घटनाएं हो चुकी हैं और दो तो पिछले दो महीनों में ही हुई हैं। हमें नहीं पता कि ऐसा क्यों हो रहा है, इसके पीछे क्या कारण हैं।’