प्रधानमंत्री उज्जवला योजना ने भारत के लाखों घरों तक एलपीजी की पहुंच बढ़ाई है।
अब देश में इसका कवरेज 95 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया है लेकिन इस क्रांतिकारी बदलाव ने करोड़ों परिवारों को खाना पकाने के लिए आयातित गैस पर निर्भर बना दिया है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से यही निर्भरता देश के लिए एक कमजोर कड़ी बन कर सामने आई है। लोग गैस सिलिंडर खरीदने के लिए लंबी कतारों में लगे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से असर
भारत में सालाना एलपीजी जरूरतों का आधा भी उत्पादन नहीं होता है। हमारे देश में आयातित गैस का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।
ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद कर देने से एलपीजी की सप्लाई पर प्रभाव पड़ रहा है।
अमेरिका-इजरायल के साथ युद्ध के चलते ईरान ने जलडमरूमध्य जलमार्ग बंद करने का फैसला किया है। ईरान के ऐसा करने से तेल की कीमतों पर काफी असर पड़ सकता है।
LPG क्रांति ने बदली भारत की तस्वीर
- 2016 में 62 फीसद घरों में एलपीजी का इस्तेमाल किया जा रहा था। लेकिन 2026 तक देश के 95 फीसद घरों को एलपीजी से जोड़ा जा चुका है।
- देश में वर्तमान समय में 33 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन हैं।
- 10 करोड़ से ज्यादा एलपीजी कनेक्शन उज्ज्वला योजना के तहत दिए गए हैं।
- सरकार के घर-घर तक एलपीजी गैस पहुंचाने के चलते गांवों और गरीब परिवारों ने लकड़ी, गोबर और कोयले से खाना बनाना कम कर दिया।
बदलाव के फायदे
- घरों में धुआं और प्रदूषण कम हुआ।
- महिलाओं और बच्चों की सेहत में सुधार हुआ।
- जंगलों से लकड़ी काटना कम हुआ।
बाधित हुआ LPG का आयात
भारत सऊदी अरब, कतर, कुवैत और यूएई से एलपीजी खरीदता है। इन देशों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही जहाज भारत पहुंचते हैं। मिडिल ईस्ट में संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य जहाजों का आना-जाना धीमा हो गया है।