ब्रिक्स बैठक में ईरान और यूएई के बीच तीखी नोकझोंक, माहौल संभालने के लिए बीच-बचाव में उतरे लावरोव…

ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की दिल्ली में आयोजित बैठक के दौरान ईरान और यूएई के बीच तीखी बहस हुई।

बैठक के एक सत्र में ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और यूएई के विदेश मामलों के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार के बीच गर्मागर्मी इस हद तक बढ़ गई कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को बीच में आकर माहौल को शांत करना पड़ा।

इस स्थिति के कारण शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक के अंतिम दिन संयुक्त बयान जारी होने की संभावना को लेकर भी अनिश्चित बनी हुई है। भारत की ओर से सभी पक्षों को मनाने की कोशिशें जारी हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बैठक की शुरुआत करते हुए अपने भाषण में सभी सदस्य देशों के प्रमुख मुद्दों को उठाने का प्रयास किया। जयशंकर ने एकतरफा प्रतिबंधों की नीति को खारिज किया और मर्जी से स्थिरता स्थापित करने की नीतियों का मुद्दा उठाकर अमेरिका पर भी निशाना लगाया।

ईरानी विदेश मंत्री ने क्या कहा?

बैठक को संबोधित करते हुए ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने अमेरिका और इजरायल का सीधे तौर पर नाम लिया और कहा कि सभी ब्रिक्स सदस्यों को इन देशों के हमलों की निंदा करनी चाहिए। इसके बाद यूएई के विदेश मंत्री ने ईरान का नाम लेते हुए कहा कि उसने यूएई के ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया, जिससे संकट और गंभीर हो गया।

अराघची ने फिर अध्यक्ष से इजाजत लेकर प्रतिक्रिया दी और स्पष्ट किया कि उसने केवल यूएई के अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। उन्होंने कहा, “ईरान पर तब हमला हुआ जब शांति स्थापित करने के लिए वार्ता चल रही थी और यह बहुत ही आश्चर्यजनक था कि अमीरात के भाइयों ने इस हमले में मदद की।”

इस पर यूएई ने फिर प्रतिक्रिया दी और ईरान को घेरा। यूएई के विदेश राज्य मंत्री शाहीन ने ईरान पर जानबूझकर दूसरे पड़ोसी मुस्लिम देशों को युद्ध में घसीटने का मुद्दा उठाया। इसके बाद अराघची ने अपना पक्ष रखते हुए इजरायल के राष्ट्रपति बेंजामिन नेतान्याहू की यूएई यात्रा का उल्लेख किया।

कहा, “इससे स्पष्ट है कि यूएई ने ईरान पर हमले में दूसरे देशों का साथ दिया।” स्थिति गंभीर होते देख रूसी विदेश मंत्री लावरोव को हस्तक्षेप करना पड़ा और दोनों पक्षों को शांत कराना पड़ा।विदित रहे कि पश्चिम एशिया संघर्ष की शुरुआत से ही ईरान और यूएई के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।

दोनों देशों एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। इस बीच, ईरान की मांग है कि ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के जारी होने वाले संयुक्त बयान में एक सदस्य देश पर हुए हमले की निंदा की जाए।

अराघची का भाषण

अराघची ने अपने भाषण में कहा, “हमारा मानना है कि ब्रिक्स को एक प्रमुख स्तंभ बनना चाहिए ताकि एक अधिक न्यायपूर्ण, संतुलित और मानवीय वैश्विक व्यवस्था का निर्माण हो सके। ऐसी व्यवस्था जिसमें ताकत कभी सही का स्थान नहीं ले सकती। ईरान ब्रिक्स सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सभी जिम्मेदार सदस्यों से अपील करता है कि वे अमेरिका और इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की स्पष्ट निंदा करें।”

यूएई इसके खिलाफ है, जिससे भारत की भूमिका भी अहम हो जाती है। खासकर तब जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को यूएई की यात्रा पर होंगे। मोदी दोपहर का भोजन यूएई के राष्ट्रपति के साथ करने वाले हैं और दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग पर दो बड़े समझौते होने की उम्मीद है।

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