H-1B वीजा पर ताजा अपडेट: अमेरिका में कानूनी इमिग्रेशन सख्त, ट्रंप नीतियों का छात्रों पर सीधा असर…

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन नीतियों को लेकर एक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है।

कोटे इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने अवैध प्रवास की तुलना में कानूनी प्रवास पर ज्यादा सख्ती दिखाई है, जिसका असर खासतौर पर छात्रों और हाई-स्किल्ड वर्कर्स पर पड़ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के दौरान कानूनी इमिग्रेशन में तेज गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट अवैध सीमा पार करने वालों की तुलना में कहीं ज्यादा है।

कानूनी प्रवास में कमी, अवैध प्रवास से करीब 2.5 गुना ज्यादा है। हर महीने करीब 1.32 लाख कम लोग कानूनी रास्ते से अमेरिका पहुंच पाए।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बदलाव केवल सीमा नियंत्रण कर सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इमिग्रेशन सिस्टम को प्रभावित करता है।

छात्रों और H-1B वीजा पर सबसे ज्यादा असर

रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे ज्यादा असर अंतरराष्ट्रीय छात्रों और प्रोफेशनल्स पर पड़ा है। स्टूडेंट वीजा में करीब 40% गिरावट आई है, वहीं H-1B वर्क वीजा में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है।

इससे अमेरिका के शिक्षा और टेक सेक्टर पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है, क्योंकि ये सेक्टर विदेशी प्रतिभाओं पर काफी निर्भर हैं।

ट्रंप के सत्ता में आने से पहले ही घटने लगा इमिग्रेशन

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अवैध इमिग्रेशन पहले ही ट्रंप के सत्ता में आने से पहले घटने लगा था। अवैध सीमा पार करने के मामलों में गिरावट पहले से जारी थी। ट्रंप प्रशासन ने इस ट्रेंड को जारी रखा, लेकिन सबसे बड़ा असर कानूनी रास्तों पर पड़ा।

कोटे इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति का फोकस केवल अवैध प्रवास रोकना नहीं था, बल्कि कानूनी प्रवास को भी बड़े पैमाने पर सीमित करना था।

इसका सबसे ज्यादा असर छात्रों और प्रोफेशनल्स पर पड़ा है, जो अमेरिका की अर्थव्यवस्था के अहम हिस्से माने जाते हैं।

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