मध्य प्रदेश भाजपा में आदिवासी नेतृत्व की कमी बनी मंत्री विजय शाह की ताकत, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया अल्टीमेटम…

ऑपरेशन सि्दूर के संदर्भ में कर्नल सोफिया कुरैशी पर मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह की आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट लगातार तल्ख टिप्पणी कर रहा है।

शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने कह दिया कि ‘अब बहुत हो गया’। हालांकि मध्य प्रदेश भाजपा में आदिवासी चेहरों की कमी विजय शाह के विरुद्ध कार्रवाई की ढाल बन रही है।

अभी भी सरकार ‘वेट एंड वाच’ की स्थिति में है
अभी भी सरकार ‘वेट एंड वाच’ की स्थिति में है और अभियोजन पर निर्णय लेने संबंधी न्यायालय के ताजा निर्देश की प्रतीक्षा की जा रही है। इसके बाद फिर विधिक अभिमत लेने की तैयारी है।

दरअसल, यह मामला विजय शाह पर अभियोजन की स्वीकृति देने यानी कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है। इसके कई मायने हैं। यही कारण है कि राज्य सरकार ने इस साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी मंत्री के विरुद्ध अभियोजन की मंजूरी नहीं दी।

मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर माफी भी मांगी
इस बीच मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर माफी भी मांगी। सुप्रीम कोर्ट में विजय शाह के वकील ने यह भी कहा कि मंत्री का भाव कर्नल सोफिया कुरैशी को अपमानित करने का कतई नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क से असहमति जताई और दो-टूक कह दिया कि हमने जो निर्देश दिए थे उसका पालन किया जाए यानी एसआइटी ने अभियोजन की अनुमति की जो मांग की है, उस पर अविलंब निर्णय लिया जाए। इसके बाद भी बहुत कुछ होता नजर नहीं आ रहा है।

भाजपा में आदिवासी चेहरों की कमी है
दरअसल, भाजपा में आदिवासी चेहरों की कमी है। आदिवासी चेहरे के नाम पर कैबिनेट में विजय शाह ही बड़ा नाम हैं। हालांकि, उनकी पकड़ निमाड़ अंचल के बाहर नहीं है।

भाजपा नहीं लेना चाहती कोई जोखिम भाजपा राज्य में आदिवासी चेहरों की कमी पूरी करने के लिए पूर्व सांसद दिलीप सिंह भूरिया को कांग्रेस से अपने पाले में लाई थी।

उनके निधन के बाद से बड़े आदिवासी चेहरे की कमी जो कमी हुई, वो आज भी बनी हुई है। उनकी बेटी निर्मला भूरिया को कैबिनेट मंत्री बनाया गया लेकिन वह दिलीप सिंह भूरिया का विकल्प नहीं बन पाईं।

महाकोशल में फग्गन सिंह कुलस्ते और ओमप्रकाश धुर्वे पार्टी का चेहरा हैं। फग्गन सिंह को केंद्र में मंत्री बनाया गया तो धुर्वे को राष्ट्रीय पदाधिकारी, मगर दोनों का दायरा सीमित रहा।

अंतर सिंह आर्य, प्रेम सिंह पटेल, मीना सिंह को भी मंत्री बनाकर बढ़ाया मगर इनका प्रभाव विधानसभा क्षेत्र के बाहर नहीं रहा।

उधर, कांग्रेस आदिवासी नेता उमंग सिंघार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और डा.विक्रांत भूरिया को आदिवासी कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर नया नेतृत्व खड़ा कर रही है। ऐसी स्थिति में भाजपा विजय शाह के विरुद्ध कार्रवाई करके कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है।

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