प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
आश्विन माह की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है।
शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा या कोजागरी लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जानते हैं। इस साल शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर, सोमवार को है।
मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी के साथ चंद्रमा को अर्घ्य देने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। शरद पूर्णिमा के दिन शाम को चांद की रोशनी में खीर रखने की परंपरा है।
मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन आसमान से अमृत वर्षा होती है।
इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होता है और उसकी किरणें अमृत के समान बनकर सेहत को लाभ पहुंचाती हैं। जानें शरद पूर्णिमा का चांद कितने बजे दिखेगा और चंद्र दर्शन व पूजन से मिलने वाले लाभ के बारे में।
शरद पूर्णिमा का चांद कितने बजे निकलेगा: हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर शुरू होगी और 7 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी।
शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम 05 बजकर 27 मिनट पर होगा। हालांकि अलग-अलग जगहों में चांद निकलने का समय थोड़ा अलग हो सकता है।
शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से क्या फल मिलता है:
1. ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। मान्यता है कि इस दिन 16 कलाओं से युक्त चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
2. शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणें अमृतमयी होती हैं। मान्यता है कि इस दिन चंद्र पूजन व अर्घ्य देने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और सेहत में सुधार होता है।
3. शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा करने से जन्मकुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है।
4. इस दिन चंद्रमा की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में खुशियां आती हैं और मां लक्ष्मी की कृपा मिलने की मान्यता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।