पापांकुशा एकादशी: सुबह 06:57 से भद्रा का साया, जानें पूजा के शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र और उपाय…

प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131

शुक्रवार के दिन एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पापांकुशा एकादशी कहलाएगी। मान्यता अनुसार, पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से पापों का नाश होता है।

उदया तिथि के अनुसार, 3 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी का व्रत रख विष्णु जी का ध्यान किया जाएगा।

इस साल पापांकुशा एकादशी पर भद्रा का साया भी मंडरा रहा है। 

ऐसे में आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी पर पूजा का मुहूर्त, विधि, उपाय, व मंत्र-

पापांकुशा एकादशी पर सुबह 06:57 से ही भद्रा का साया

पंचांग अनुसार, भद्रा सुबह 06:57 मिनट से 06:32 पी एम तक रहेगी। पृथ्वी पर भद्रा तब मान्य होती है जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ या मीन राशि में होते हैं। 3 अक्टूबर को चंद्रमा मकर राशि में 09:27 पी एम तक रहेंगे व इसके बाद कुंभ राशि में जाएंगे। ऐसे में भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा।

सुबह-शाम के पूजा मुहूर्त

  1. ब्रह्म मुहूर्त: 04:38 ए एम से 05:26 ए एम
  2. अभिजित मुहूर्त: 11:46 ए एम से 12:34 पी एम
  3. विजय मुहूर्त: 02:08 पी एम से 02:55 पी एम
  4. गोधूलि मुहूर्त: 06:05 पी एम से 06:29 पी एम
  5. अमृत काल: 10:56 पी एम से 12:30 ए एम, अक्टूबर 04
  6. सर्वार्थ सिद्धि योग: 06:15 ए एम से 09:34 ए एम
  7. रवि योग: 06:15 ए एम से 09:34 ए एम
  8. लाभ – उन्नति 07:44 ए एम से 09:12 ए एम
  9. अमृत – सर्वोत्तम 09:12 ए एम से 10:41 ए एम
  10. शुभ – उत्तम 12:10 पी एम से 01:39 पी एम
  11. चर – सामान्य 04:36 पी एम से 06:05 पी एम

मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, ॐ नमो नारायणाय, ॐ विष्णवे नमः, ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्ध लक्ष्मी नारायण नमः

पूजा-विधि

  • स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें
  • भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें
  • प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
  • अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
  • मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
  • संभव हो तो व्रत रखें और व्रत लेने का संकल्प करें
  • पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें
  • पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें
  • प्रभु को तुलसी दल सहित भोग लगाएं
  • अंत में क्षमा प्रार्थना करें

भोग: पंचामृत, फल, ड्राई फ्रूइट्स, सात्विक खीर, मालपूआ, मिठाई

उपाय: श्री विष्णु चालीसा का पाठ करें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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