किडनी खरीदने-बेचने और अवैध ट्रांसप्लांट मामले में जेल में बंद आरोपित दलाल शिवम अग्रवाल से मंगलवार को पुलिस ने तीन घंटे तक पूछताछ की। उससे 50 सवाल पूछे गए। इस दौरान, उसने कुछ सवालों के जवाब दिए तो कई पर गोलमोल घुमाने की कोशिश करता रहा।
हालांकि, बातों ही बातों में उसने कई अहम राज उगल दिए। उसने बताया कि गिरोह के सरगना डा. रोहित से उसकी करीब चार साल पहले दिल्ली में मुलाकात हुई थी।
इसके बाद से वह किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अस्पतालों की व्यवस्था करता था। कितने लोग शहर आ रहे, कहां ट्रांसप्लांट होना है और इसके बाद उन्हें किस अस्पताल में शिफ्ट करना है, इसकी जिम्मेदारी शिवम ही संभालता था। डा. रोहित के जरिये ही गिरोह के अन्य सदस्यों से भी उसका संपर्क हो गया था।
500 लोगों के नंबरों की निकाली गई सीडीआर
पुलिस ने किडनी खरीदने-बेचने वाले गिरोह व उनके संपर्क में रहने वाले लगभग 500 लोगों के नंबरों की सीडीआर निकलवाई है। 100 से ज्यादा लोगों के नंबरों को सर्विलांस पर भी लगाया गया है।
इसी कड़ी में कल्याणपुर निवासी किडनी दलाल शिवम अग्रवाल के मोबाइल फोन से किडनी खरीदने-बेचने व ट्रांसप्लांट से जुड़े लोगों की कई फोटो, वीडियो और वाट्सएप चैट पुलिस ने रिकवर किए हैं।
इस पर उसका बयान दर्ज करने के लिए पुलिस ने सोमवार को कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। मंगलवार सुबह लगभग नौ बजे विवेचक मनोज कुमार जेल पहुंचे और शिवम के बयान लिए गए।
गिरोह से जुड़े लोगों, किडनी खरीदने-बेचने वालों और मरीजों को लाने-ले जाने का जिम्मेदारी संभालने वाले कार चालक परवेज सैफी से भी पुलिस राज उगलवाने में जुटी है।
मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली, लखनऊ के कई अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट होने की आशंका पर पुलिस वहां भी नोटिस भेज रही है। संबंधित जिले के सीएमओ को भी पत्र भेजने की तैयारी है।
दलाल नवीन के घरवाले भी बरगलाते रहे, सख्ती पर उगली सच्चाई
प्रयागराज के मांडा थाना क्षेत्र स्थित जेरा गांव निवासी एक अन्य किडनी दलाल नवीन पांडेय घर से भागा हुआ है। उसके घरवाले भी पुलिस को गोलमोल जवाब देते रहे।
पहले बताया कि नवीन कानपुर देहात की एक फैक्ट्री में काम करता है। हालांकि, जब उसे बुलाने को कहा गया तो बताया कि वह दिल्ली गया है। क्या करने गया है, के सवाल पर चुप्पी साध ली।
सख्ती से पूछताछ हुई तो पता चला कि वह मऊ में अपनी ससुराल गया है। हालांकि, वहां से भी वह निकल गया। उसकी लोकेशन मऊ, फिर प्रयागराज मिली। इस पर पुलिस टीम प्रयागराज में डेरा जमाए हुए है।
पुलिस के अनुसार, आरोपित दलाल नवीन भी डॉ. रोहित के लिए वही काम एनसीआर में करता था, जो काम शिवम कानपुर में करता था।
किडनी देने वाले व्यक्ति का बदलते रहते थे ठिकाने
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह का सबसे ज्यादा ध्यान किडनी देने वाले व्यक्ति पर रहता है।
जैसे ही उन्हें कोई किडनी देने वाला मिलता है, तो उसे रुपये का लालच देकर राजी किया जाता है। इसके बाद उसे गिरोह के बीच में ही रखा जाता है, ताकि वह किसी से न मिल सके। किडनी निकालने के बाद उसे पहले उसी शहर के दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर दिया जाता है।