कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को निशाना बनाकर किए गए स्टिंग ऑपरेशन के दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के विवाद में बेंगलुरु पुलिस ने बुधवार को दो नाबालिगों और एक जेडीएस कार्यकर्ता समेत पांच लोगों को हिरासत में लिया है।
पुलिस ने आईपी एड्रेस के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद तीन लोगों को छोड़ दिया।
सीबीआई जांच की मांग खारिज
राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने सीबीआई जांच की मांग को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस इस मामले को संभालने में पूरी तरह सक्षम है और यह सिद्धरमैया की छवि खराब करने की साजिश है। उन्होंने पूछा कि इस केस में CBI जांच की क्या जरूरत है?
वहीं, केंद्रीय मंत्री और JDS नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने कांग्रेस सरकार पर स्टिंग के पीछे शामिल मुख्य साजिशकर्ताओं को पकड़ने के बजाय जेडीएस कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया टीम के सदस्यों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस JDS की सोशल मीडिया टीम के एक और सदस्य मोहन के घर भी गई और उनके परिवार को परेशान किया।
क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत केंद्रीय मंत्री और JDS नेता एचडी कुमारस्वामी के एक बड़े और सनसनीखेज आरोप से हुई। आरोप यह है कि सिद्धरमैया को हटाने के लिए एक स्टिंग ऑपरेशन का इस्तेमाल किया गया था। इतना ही नहीं कुमारस्वामी ने यहां तक आरोप लगा दिया कि इसके पीछे मौजूदा मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का हाथ था।
कुमारस्वामी का दावा है कि सिद्धरमैया को यह कहकर दिल्ली बुलाया गया था कि मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा होगी, लेकिन वहां उन्हें स्टिंग से जुड़े कुछ दस्तावेज और वीडियो दिखाकर इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया।
मेरे खिलाफ दुष्प्रचार- सिद्धरमैया
सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि इंटरनेट मीडिया पर उनके खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने वीडियो से किसी भी तरह का संबंध होने से इन्कार करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इस संबंध में उन्होंने शहर के पुलिस आयुक्त के पास शिकायत भी दर्ज कराई। उनके बेटे और कर्नाटक के मंत्री यतींद्र सिद्धरमैया ने वीडियो को फर्जी बताते हुए इसे अपने पिता की छवि खराब करने की साजिश करार दिया। उन्होंने वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। जिसके बाद पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी है।