कर्नाटक सरकार ने बुधवार को छात्रों में डिजिटल तकनीक के अत्यधिक और असुरक्षित उपयोग को लेकर बढ़ती चिंताओं को दूर करने के लिए एक नीति का मसौदा जारी किया।
इसमें मानसिक स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसे स्कूलों में लागू करने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।
मसौदा नीति का सारांश जारी करते हुए स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा कि जनता स्वास्थ्य और शिक्षा पर मोबाइल फोन के नकारात्मक प्रभावों से अवगत है। इसके चलते चिंता, अनिद्रा और सामाजिक अलगाव जैसी चीजें सामने आ रही हैं।
मोबाइल फोन के कारण परिवार के सदस्य आपस में कम बातचीत कर रहे हैं। यह हमारे सामाजिक ढांचे को बिगाड़ रहा है। हमने इनका इस्तेमाल करना तो सीख लिया है, लेकिन इनके नकारात्मक प्रभावों को नहीं समझा है।
नीति में बच्चों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को कम करने के लिए माता-पिता और शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। नीति में कहा गया है कि लगभग एक चौथाई किशोरों में इंटरनेट उपयोग के चलते समस्याएं दिखाई दे रही हैं।
पॉलिसी फ्रेमवर्क का मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में डिजिटल साक्षरता, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और साइबर सुरक्षा को एकीकृत करके छात्रों में प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना है।
मसौदे में प्रस्ताव है कि प्रत्येक विद्यालय अपनी स्वयं की डिजिटल उपयोग नीति तैयार करे, जिसमें स्क्रीन-टाइम मानदंड निर्धारित करना, मनोरंजन के लिए प्रतिदिन एक घंटे की सीमा तय करना, साइबर दुर्व्यवहार से निपटना और परामर्श सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है।
मसौदा नीति छात्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए शारीरिक व्यायाम और आफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर देती है।