मॉस्को में जस्टिस सूर्यकांत का बयान, बोले- न्याय प्रणाली में मानवीय तत्व जरूरी…

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने मंगलवार को कहा कि न्याय का प्रशासन असल में मानवीय प्रयास ही रहना चाहिए। एआइ जजों की मदद कर सकता है, लेकिन यह नतीजे तय नहीं कर सकता या न्यायिक विवेक का इस्तेमाल नहीं कर सकती।

मॉस्को में रूसी सुप्रीम कोर्ट के चेयरमैन इगोर क्रास्नोव के साथ बैठक में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर प्रौद्योगिकी अदालत की क्षमताओं को बढ़ाती है, तो यह लोगों में निवेश है जो तय करता है कि उन क्षमताओं का कितना असरदार तरीके से इस्तेमाल किया जाता है।

उन्होंने कहा कि संस्थानों का विकास हो सकता हैं, प्रौद्योगिकियां बदल सकती हैं और नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं, लेकिन अदालतों का असल मकसद न्याय को ऐसे कायम रखना है जो जनता का भरोसा जीते।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “फिर भी जब हम नवाचार को अपनाते हैं, तो हम इसकी सीमाओं के बारे में पूरी तरह सचेत रहते हैं। न्याय का प्रशासन असल में एक मानवीय प्रयास है और इसे बना रहना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि एआइ जानकारी को व्यवस्थित करने, अनुवाद में मदद करने, ट्रांसक्रिप्ट बनाने और प्रशासनिक प्रक्रिया आसान बनाने में जजों की मदद कर सकता है, लेकिन नतीजे तय नहीं कर सकता, गवाहों की विश्वसनीयता का अंदाजा नहीं लगा सकता, सुबूतों का मूल्यांकन या न्यायिक विवेक का इस्तेमाल नहीं कर सकता।”

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