जयशंकर ने कहा कि भारत-नेपाल संबंधों की दिशा में निर्णायक बदलाव लाने का यह एक महत्वपूर्ण अवसर है और भविष्य की साझेदारी पर जोर दिया…

भारत और नेपाल का रिश्ता सिर्फ दो देशों की सीमाओं का मेल नहीं, बल्कि दो दिलों और साझी संस्कृति का ऐसा संगम है जो सदियों से अटूट रहा है।

नई दिल्ली में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के साथ हुई ‘बेहद आत्मीय बैठक’ में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है जब दोनों देश अपने आपसी संबंधों को एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ दे सकते हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस संकल्प को दोहराया जिसमें भारत अपने इस पड़ोसी मित्र देश के साथ मिलकर तरक्की, समृद्धि और दोनों देशों के नागरिकों के बेहतर भविष्य के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चलने को प्रतिबद्ध है।

पुराने भरोसे से नए युग की शुरुआत जयशंकर ने दोनों देशों के ‘रोटी-बेटी’ के पारंपरिक और आत्मीय संबंधों को याद करते हुए कहा कि हमारा रिश्ता आपसी विश्वास, सद्भावना और साझी विरासत की मजबूत बुनियाद पर टिका है।

व्यापार, कनेक्टिविटी और संस्कृति के पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर अब दोनों देशों को स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे आधुनिक क्षेत्रों में कदम बढ़ाना चाहिए।

पश्चिम एशिया के संकट के दौर में भी भारत ने नेपाल को बिना किसी बाधा के ईंधन की आपूर्ति जारी रखकर अपनी सच्ची दोस्ती और संप्रभुता के प्रति एकजुटता को साबित किया है।

बिना किसी ‘पुरानी कड़वाहट’ के भविष्य की ओर कदम

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल की यह तीन दिवसीय भारत यात्रा हालिया सीमा विवाद की छाया के बीच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने बेहद सकारात्मक और भावुक रुख अपनाते हुए कहा कि नेपाल भारत के साथ अपने संबंधों को “सर्वोच्च प्राथमिकता” देता है।

उन्होंने साफ किया कि नेपाल की नई सरकार अतीत की किसी नकारात्मक विरासत या “पुरानी कड़वाहट के बोझ” को ढोने के बजाय, भारत के साथ एक बिल्कुल नए, व्यावहारिक और परिवर्तनकारी रिश्ते की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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